परिवहन मंत्री ने जांच रिपोर्ट के हवाले से किया खुलासा
दस दिन में जमा कराए 8.14 करोड़ के पुराने बड़े नोट
दोषी अधिकारियों को निलंबित कर मामले की जांच एसीबी को सौंपने के आदेश
केंद्र सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के अधिकारियों ने नोट बदली में बड़ा घपला कर दिया है। यात्रियों से मिले छोटे नोट या वैध नोट की जगह बैंकों में अधिकारियों ने एक दो नहीं बल्कि पांच सौ और हजार के 1, 29,324 (8.16 करोड़ रुपये) पुराने नोट जमा करा दिए।
डीटीसी के पश्चिम जोन में ये धांधली सबसे ज्यादा हुआ है। परिवहन मंत्री सत्येंद्र जैन ने जांच रिपोर्ट के हवाले से इसका खुलासा किया है। हालांकि जैन ने यह भी बताया कि अंबेडकरनगर और सरोजनीनगर डिपो से पुराने नोट जमा नहीं कराए गए।
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मंत्री ने दोषियों को निलंबित कर मामले की जांच एसीबी को सौंपने के आदेश दिए है। जैन ने बताया है कि केंद्र सरकार ने पुराने 500 और एक हजार के नोट 8 नवंबर को बंद किया । 9 नवंबर को विभाग में सरकुलर जारी कर दिया गया कि पुराने नोट यात्रियों से नहीं लें।
लेकिन जब दस दिन में बैंकों में जमा राशि का आकलन किया गया तो इसका खुलासा हुआ कि करीब आधा दर्जन डिपो ने इस दौरान 99 फीसदी राशि पुराने अवैध नोट में जमा की।
जैन ने कहा है कि ये बदले गए नोट या तो डीटीसी अधिकारियों के रिश्वत के हैं या फिर बाहर से कमीशन पर बदले हैं?
परिवहन आयुक्त को आदेश दिए हैं कि जो अधिकारी दोषी हैं उन्हें तुरंत निलंबित करें। इसके साथ ही मामले की गहराई से जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को जांच के लिए केस सौंपे। जैन ने यह भी बताया कि कुछ जगह बताया गया है कि कंडक्टर ने पे-बिल जमा नहीं कराए, ये भी घोटाला है।
घपले में डीटीसी पश्चिमी जोन सबसे आगे
दिल्ली सरकार की प्राथमिक जांच में नोट बदली के घपले में जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके हिसाब से सबसे आगे पश्चिमी जोन सबसे आगे है। पुराने नोट में एक हजार रुपये के 33,647 नोट जमा हुए जिसमें 16593 नोट पश्चिमी जोन के ही हैं।
इसी तरह से 500 रुपये के 95677 नोट जमा कराए गए जिसमें से अकेले पश्चिमी जोन 43636 नोट जमा किए गए। डीटीसी अधिकारियों की निडरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 5 रुपये, 10 रुपये, 15 रुपये, 20 रुपये, 25 रुपये के टिकट में 1,29,324 नोट 500 और एक हजार के कैसे पहुंच सकते हैं?
किस जोन में कितने 500, 1000 के नोट हुए जमा
जोन एक हजार रुपये पांच सौ रुपये
उत्तरी 5795 17905
पूर्वी 7855 23,287
पश्चिमी 16,593 43636
दक्षिण 3404 10849
कुल 33,647 95677
समरी से होगा घोटाले का खुलासा
डीटीसी के कंडक्टर जो पैसा यात्रियों से जमा करते हैं, वो सभी नोट व सिक्कों की संख्या सूचना (समरी) के साथ डिपो के कैशियर केपास जमा कराते हैं। तीन शिफ्ट के कैशियर अपनी-अपनी समरी बनाकर राशि जमा करते हैं।
अगले दिन आने वाला कैशियर उस राशि को बैंक (जो डिपो में ही हैं या फिर वैन आती है) जमा करता है। मसलन, जब कंडक्टर पुराने नोट नहीं ले रहा था तो ये नोट 100, 50, 20, 10, 5 रुपये या छोटे सिक्के रहे होंगे।
अखिल भारतीय मजदूर महासंघ के पूर्व सचिव ओपी बैरवा का कहना है कि नोट बदली की पड़ताल में कंडक्टर और कैशियर की तरफ से लिखी गई समरी से घोटाले के स्तर का खुलासा होगा। हालांकि डिपो प्रबंधक, क्षेत्रीय प्रबंधक की सहमति के बिना इतना बड़ा खेल होना जानकार असंभव बता रहे हैं।
50 फीसदी रह गया डीटीसी का राजस्व
नोटबंदी का असर जहां व्यापार पर पड़ा है, वहीं डीटीसी के राजस्व पर भी पड़ा है। परिवहन मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि नोटबंदी के दौरान राजस्व में 50 फीसदी की कमी आई है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि डीटीसी में राजस्व का सबसे बड़ा जरिया टिकट है, यानी नोटबंदी में यात्री घटे हैं।