आर्थोपेडिक सर्जन डा. धनंजय गुप्ता ने कहा कि देश में औसत उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्ग अवस्था में घुटना या कूल्हा खराब होने की समस्या अधिक मिल रहे हैं। इस सर्जरी के बाद यह कहा जा सकता है कि अधिक उम्र के बुजुर्ग को भी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मथुरा के पास वृंदावन के एक आश्रम में रहने वाली रेशम देवी 97 साल की उम्र में सर्जरी करवाने आई थी। आज उनकी उम्र 98 साल है। वह गंभीर आस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थीं। उनके दोनों घुटने खराब हो गए थे। जिस कारण वह दैनिक कामकाज के लिए दूसरों पर आश्रित थी।
अधिक उम्र, हड्डियां कमजोर, फेफड़ा व हृदय भी पूरी तरह सामान्य रूप से काम नहीं करने के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। सर्जरी से पहले हड्डियों की मजबूती के लिए छह माह तक टेरीपैराइड, कैल्शियम और विटामिन डी के इंजेक्शन दिए गए। फिजियोथेरेपी व सांस से संबंधित व्यायाम भी कराए गए। इसके बाद सर्जरी कर एक साथ दोनों घुटने बदले गए। इसके 24 घंटे बाद वाकर के सहारे धीर-धीरे चलाना शुरू कर दिया। आज काफी सुधार है।