अधिग्रहित जमीनों पर चले आ रहे विवाद शहर के विकास के लिए बाधा बन रहे हैं। नए व पुराने गुरुग्राम में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने 90 स्थान चिन्हित किए हैं जिन पर विवाद है। विवाद के कारण पानी-सीवर की लाइन डालने का कार्य भी पूरा नहीं हो पा रहा। सड़क भी बीच रास्ते में रुकी हुई हैं।
नए गुरुग्राम सेक्टर-58 से 115 को विकसित करने के लिए नगर योजनाकार विभाग ने बिल्डरों को लाइसेंस दिए थे। सेक्टर विकसित करने के लिए कुछ जमीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने अधिग्रहित की थी।
वहीं, कुछ जमीन बिल्डरों ने सीधे किसानों से खरीदी थी। नगर योजनाकार विभाग ने लाइसेंस देते वक्त सोसाइटी से मुख्य सड़क तक आने वाली जमीन पर सड़क बनाने का जिम्मा बिल्डर को ही दिया था, लेकिन बिल्डर ने सड़क बनाने की बजाय एचएसवीपी को ही कह दिया।
एचएसवीपी ने जब अधिग्रहित जमीन पर सोसाइटी निवासियों को मूलभूत सुविधाएं देनी शुरू की तो लोगों ने अदालत का रुख कर लिया। अधिग्रहित जमीन पर छोटे-छोटे हिस्सों में 150 से भी अधिक विवाद थे। इसमें से अभी भी 90 विवाद शेष हैं।
केस में खुद पैरवी करेगा जीएमडीए
करीब एक साल पहले जीएमडीए ने नए सेक्टरों को विकसित करने की जिम्मेदारी एचएसवीपी से ले ली। जब लोगों को सुविधाएं देने के लिए कार्य शुरू किया तो यह विवाद बीच में आ गए। इन विवादों को सुलझाने के लिए जीएमडीए अदालत में खुद पार्टी बनकर केस की पैरवी करेगा।
जलभराव का कारण बन रहा विवाद
केस के कारण अटकी परियोजनाएं जलभराव का कारण बन रही हैं। बरसाती नाले बीच में बंद होने के कारण पानी सड़कों पर भर रहा है। नए गुरुग्राम के ज्यादातर सेक्टर में सीवर व पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही है। बादशाहपुर बरसाती नाला भी इसी विवाद में शामिल है। सबसे अधिक परेशानी सेक्टर-88, 81, 82, 99 समेत आसपास क्षेत्र में है।
विकास कार्यों में 90 विवाद निकलकर सामने आए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि इन विवादों को तीन महीने के भीतर सुलझा दिया जाए।- वी एस कुंडू, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जीएमडीए