गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों वाली संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया, साथ ही बेंच ने ये भी कहा कि निजता की सीमा तय की जा सकती है। जानिए बेंच के किस सदस्य ने निजता पर क्या कहा।
जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार अविच्छेद्य हैं। इनके बिना गरिमामय मानवीय अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती है। ये संविधान की देन नहीं हैं बल्कि प्राकृतिक अधिकार हैं। जबकि निजता संवैधानिक अधिकार है और मौलिक अधिकारों से पैदा होता है।
-जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़
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मौैलिक अधिकार हमारी स्वतंत्रता में राज्य की दखलंदाजी को रोकने की एकमात्र दीवार हैं। निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में समाहित है। इस अधिकार की हर कीमत पर सुरक्षा होनी चाहिए।
- जस्टिस जे चेलमेश्वर