इस सेक्शन से गुजरने वाली ज्यादातर गाड़ियों में यूपी जीआरपी की एस्कॉर्ट होती है। यूपी के आलाधिकारी 882 ट्रेनों में एस्कॉर्ट का दावा करते हैं फिर भी बदमाशों ने इंटरसिटी एक्सप्रेस में डकैती की घटना को अंजाम दे दिया।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है तो शुक्रवार को इंटरसिटी एक्सप्रेस में एस्कॉर्ट की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? इस पर अधिकारी मैनपावर की कमी का बहाना बना रहे हैं।
जीआरपी से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि यूपी जीआरपी प्रतिदिन 882 ट्रेनों में सुरक्षा मुहैया कराती है। यानि करीब 9227 किलोमीटर तक करीब 13 लाख यात्रियों की सुरक्षा जीआरपी करती है।
प्रदेश में 65 जीआरपी पुलिस स्टेशन और 43 आउट पोस्ट चौकी बनाई गई है। यानि प्रदेश में 922 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों पर जीआरपी की तैनाती है। करीब 6000 पुलिसकर्मी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने इस संबंध में 23 मार्च के अंक में आगाह किया था कि जब ट्रेनों में एस्कॉर्ट ही नहीं तो कैसे सुरक्षित रहेंगे यात्री।
मैनपावर की कमी का रो रहे रोना:
आगरा जीआरपी के डिप्टी एसपी राजेंद्र सिंह का कहना है कि उनके पास अभी अतिरिक्त प्रभार है। जहां तक उन्हें जानकारी है कि कई जीआरपीकर्मियों का तबादला हो गया है।
चूंकि इंटरसिटी एक्सप्रेस में राजामंडी चौकी से एस्कॉर्ट की ड्यूटी लगती है। ऐसे में मैनपावर की कमी के चलते उक्त गाड़ी को एस्कॉर्ट नहीं किया गया था। अब अन्य स्थानों से पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। जल्द ही यह समस्या खत्म हो जाएगी।