दिल्ली की एक अदालत ने तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले बांग्लादेश के 82 नागरिकों को जमानत दे दी। बांग्लादेशी नागरिकों पर वीजा नियमों के उल्लंघन के अलावा कोरोना वायरस के मद्देनजर जारी सरकारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने और मिशनरी गतिविधियों में गैरकानूनी तरीके से शामिल होने के भी आरोप हैं।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर ने 10-10 हजार के निजी मुचलके पर यह राहत दी। विदेशी नागरिकों की ओर से पेश वकील आशिमा मंडला और मंदाकिनी सिंह ने बताया, आरोपी शनिवार को समझौता आवेदन (प्ली बार्गेनिंग एप्लिकेशन) देंगे। इसके तहत आरोपी दोष स्वीकार कर लेता है और कम दंड देने की याचना करता है।
दंड प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत जिन मामलों में अधिकतम सजा सात साल है, उनमें समझौता आवेदन देने की इजाजत होती है। इसमें ऐसे अपराध आते हैं जो समाज की सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित नहीं करते हों। इसके अलावा ऐसे अपराध जो महिला या 14 साल से कम उम्र के बच्चे के खिलाफ न हों। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के दौरान ये लोग अदालत के समक्ष पेश हुए थे।
956 विदेशी नागरिकों के खिलाफ जांच पूरी
इससे पहले अदालत ने मंगलवार को 122 मलयेशियाई नागरिकों को जमानत दी थी। बुधवार को 21 देशों के 91 विदेशी नागरिकों के अलावा आठ देशों के 76 नागरिकों को बृहस्पतिवार को जमानत मिल गई थी। पुलिस ने अदालत को बताया था कि 956 नागरिकों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। विदेशी नागरिकों ने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज में एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इसके बाद अप्रैल में देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े थे।