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800 साल पुराना इतिहास समेटे है सोहनगढ किला

Mon, 19 Dec 2016 01:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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banasur fort
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सोहना के प्राचीन सोहनगढ किले का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। रखरखाव व मनचलों का अड्डा बनता जा रहा है। वहीं सरकार व पुरातत्व विभाग ने प्राचीन किले को संवारने की पहल नहीं की है। जिससे उक्त किले का नामोनिशान मिटने लगा है। जिससे नागरिकों में रोष हैं।
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लोगों ने ऐतिहासिक प्राचीन किले का सौंदर्यकरण कराने को कहा हैं। देश की राजधानी दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर व साईबर सिटी गुडग़ांव से मात्र 25 किलोमीटर अरावली पहाडिय़ों की तलहटी में बसा सोहना कस्बा अपनी अद्भुत व प्राचीन धरोहरों के कारण देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी विख्यात हैं। 

अरावली पहाडिय़ों के बीच घिरा होने से कस्बे की छंटा निराली है। कस्बे के प्राकृतिक गंधमुक्त गर्म जल सरोवर के पानी को पर्यटक भुला नहीं पाते हैं। उक्त पानी में अनेकों विश्वसनीय मान्यताएं सम्मलित हैं। इन्ही पहाडिय़ों में सोहना के इतिहास सरकारी उपेक्षा के चलते बदहाली के आंसू बहा रहा है। वर्तमान में किले के मात्र चंद अवशेष ही शेष बचे हैं, जो किले की प्राचीन दशा को बयां कर रहे हैं। 
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किले का इतिहास-
कस्बे के सोहना-तावड़ू मार्ग पर पहाडिय़ों में स्थित सोहनगढ किले का इतिहास काफी प्राचीन हैं। पूर्व में सोहना कस्बे को सोहनगढ के नाम से जाना जाता था। बेहद मजबूत व पुराना किला करीब 800 वर्ष पुराना बताया जाता हैं। जो इतिहास के कई अध्यायों को खुद में समेटे हुए हैं। 

बताते है कि जब राजा सावन सिंह ने फुलबा का अपहरण करके अपनी रानी बनाया था, तब किले का निर्माण कराया था। पूर्व में राजा महाराजाओं का निवास रहा हैं। ऐतिहासिक प्राचीन किला वर्तमान में खंडर हालत में पहुंच गया हैं। 

क्या कहते है नागरिक-
कस्बे के प्रब्रद्ध नागरिक पार्षद विक्की लटठ, पूर्व पार्षद डा. सतीश तंवर, सर्राफा यूनियन पूर्व प्रधान अशोक वर्मा, व्यापारी नेता रामबाबू गुप्ता का कहना है कि अगर सरकार व प्रशासन किले को संवारने का प्रयास करें, तो सुंदर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। 
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