सफर वही, मंजिल नई जैसी लाइन परदेसी परिंदों पर सटीक बैठ रही है। इसकी बानगी ओखला पक्षी विहार जहां सीजन में अब तक 12 हजार पक्षी पहुंच चुके है। वहीं, रविवार को धनौरी वेटलैंड का आंकड़ा 25 हजार को पार कर चुका है।
पक्षी प्रेमियों में इस बात को लेकर खास उत्साह है। अब उन परिंदों का इंतजार है जो हजारों किलोमीटर दूर साइबेरियन देशों से यहां प्रवास करने के लिए उड़ान भर चुके हैं। गौरतलब है कि ओखला पक्षी विहार व वेटलैंड जनपद के दो प्रमुख वेटलैंड है, लेकिन दोनों वेटलैंड अतिक्रमण व प्रदूषण का शिकार हैं।
इसके बाद भी अपनी प्राकृतिक छटा के चलते यहां प्रवासी परिंदे डेरा जमाने पहुंच रहे हैं। नवंबर से अब तक ओखला में 12 हजार परिंदे प्रवास कर चुके हैं जबकि धनौरी में यह संख्या 25 हजार से ज्यादा है। जबकि जनवरी पहले सप्ताह में इनकी संख्या 40 हजार पहुंचने की बात बताई जा रही है।
धनौरी में सुदूर क्षेत्रों सेंट्रल एशिया, यूरोप व लद्दाख से आने वाले परिंदों की संख्या सबसे ज्यादा है। वहीं, अफ्रीका, कनाडा, आस्ट्रेलिया देशों से भी परिंदों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। यह परिंदे झुंड में यहां पहुंचते नजर आ रहे हैं।
प्रकृति के करीब धनौरी
अच्छी बात यह है कि धनौरी की झील अब भी प्रकृति के काफी करीब है। लिहाजा यहां भोजन की कोई कमी नहीं है। इसमें कीट, शैवाल, छुपने के लिए झाड़ियां एकांत महौल के अलावा खासा इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में परिंदों की संख्या यहां सबसे ज्यादा है।
हर साल की तरह इस बार भी सारस की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है, लेकिन इसके अलावा ब्लैक स्टाक, कामन स्टोनचैट, सारस क्रेन, शवलर्स, पोचार्ड, सैंडपाइपर्स जैसे परिंदों की संख्या भी अधिक है। बर्ड वाचरों की मानें तो वेटलैंड में 16 दिसंबर को 10 नेस्ट पाए गए हैं। जो सारस क्रेन द्वारा दिए गए हैं।
साइबरेयिन की कमी होगी पूरी
पर्यावरण विद् व बर्ड वाचर आनंद आर्या ने बताया कि इस बार उनकी साइबेरियन पक्षियों को कैमरे में कैद करने की हसरत पूरी हो सकेगी। मौसम भी उन पर मेहरबान है। ठंड होने के साथ साइबरेयिन पक्षी इस ओर रुख करेंगे। उनको शांति पसंद है, जाहिर है वह पक्षी झुंड में धनौरी वैटलैंड पहुंच चुके हैं।