सांड़ के ऑपरेशन के बाद उसके पेट से कील, लोहे-प्लास्टिक के ढक्कन, हेयरबैंड, रबड़, नट-बोल्ट, पेंसिल सहित करीब अस्सी किलो पॉलीथिन निकली है। झज्जर स्थित गोकुलधाम सेवा समिति की डॉक्टर अंजली और उनकी टीम ने सर्जरी की।
एसजीएम नगर में घूमते इस सांड़ की फोटो अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इसके बाद गोवंश सेवकों ने गोकुलधाम टीम से संपर्क किया।
एसजीएम नगर में रहने वाले सचिन चौधरी ने बताया कि रविवार एक सांड़ इलाके में घूमता दिखा था। इसका पेट थोड़ा सा कटा हुआ था। इसमें से पॉलीथिन बाहर निकल रही थी। दर्द से कराहता सांड़ बेचैन था और इधर-उधर भाग रहा था।
गोवंश सेवकों ने इसके बाद झज्जर की पशु प्रेमी संस्था गोकुलधाम की डॉक्टर अंजली से संपर्क किया। सोमवार को गोकुलधाम के डाक्टरों की टीम फरीदाबाद आई और सांड़ को पकड़कर अपने साथ ले गई।
डॉ. अंजली ने बताया कि करीब तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में सांड़ के पेट से हैरानी कर देने वाली चीजें निकलीं। यह वो चीजें थी, जो घरेलू उपयोग के बाद फेंक दी जाती हैं।
इन चीजों में लोहे की कील, ब्लेड, वासर, बोल्ट, जिप, सिक्का, तार, पेंसिल आदि शामिल हैं। संभवत: इन सामानों को खाने की वस्तुओं के साथ किसी ने पॉलीथिन में बांधकर फेंका होगा। इसे सांड़ ने पॉलीथिन समेत खा लिया।
उन्होंने बताया कि उसके पेट से करीब 80 किलो पॉलीथिन निकली है। वह अब बिलकुल ठीक है। फिलहाल उसे गोकुलधाम के अस्पताल में ही रखा गया है। डॉ. अंजली ने कहा कि पॉलीथिन के प्रयोग से लोगों को बचना चाहिए। खाने की वस्तुओं को कभी भी पॉलीथिन में बांधकर न फेंके। भूखे पशु ऐसे सामान को पॉलीथिन समेत ही खा जाते हैं।
अमर उजाला ने इस खबर को 9 सितंबर के अंक में प्रमुखता से फोटो समेत प्रकाशित किया था।