न्यू वर्ल्ड हैकिंग ग्रुप साइबर अटैक की फिराक में है। यह ग्रुप इंटरनेट की सेवाओं को एक साथ बाधित कर सकता है। इसमें सोशल साइट, सेल परचेज और अन्य साइट शामिल हैं।
इनका प्रतिदिन का व्यवसाय करोड़ों रुपये है। हैक होने पर वेबसाइट पूरी तरह क्रैश नहीं होंगी, बल्कि यूजर वेबसाइट में लॉगिन नहीं कर सकेगा। इस तरह की हैकिंग रोकने को साइबर सेल की टीमें ग्रुप को इंटरसेप्ट करने में जुटी हैं। नोएडा में भी तमाम कॉल सेंटर है इसलिए नोएडा साइबर सेल टीम को भी अलर्ट कर दिया गया है।
ग्रुप ने पुलिस और साइबर सेल टीम के होश उड़ा रखे हैं। ग्रुप से जुड़े 12 लोगों की अभी तक प्रोफाइल मिली है, जिसमें 8 लड़के और 4 लड़कियां हैं। ग्रुप को कहां से चलाया जा रहा है तथा ये कौन लोग हैं इसका पता नहीं लग रहा। हालांकि साइबर सेल की टीमें इनकी लोकेशन जानने का प्रयास कर रही है। अन्य राज्यों की टीमें नोएडा साइबर सेल से संपर्क बनाए हुए हैं। इससे जुड़ी तमाम जानकारी एक दूसरे से साझा की जा रही है।
ग्रुप ने ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया है जो देश की अधिकांश वेबसाइट को डाउन कर सकता है। साइबर भाषा में इसे डीडीओएस (डिस्ट्रीब्यूटेड डाएगन्ल ऑफ सर्विस) अटैक का नाम दिया है। सूत्रों की मानें तो ट्रायल के तौर पर पिछले माह ग्रुप ने नोएडा के जेएसएस इंस्टीट्यूट, बीबीसी और अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप की वेबसाइट लिंक को डाउन कर दिया था। वेबसाइट तो खुल रही थी, लेकिन उसमें लॉगिन नहीं किया जा सकता।
डीडीओएस अटैक के जरिये हैकर किसी एक वेबसाइट को निशाना बनाते हैं। अटैक के साथ ही प्रमुख वेबसाइट पर इतने ज्यादा कनेक्शन जुड़ने लगते हैं कि वेबसाइट का अपना लॉगिन आईडी खुद क्रैश हो जाता है। ऐसे में वेबसाइट से जुड़ा कोई भी यूजर लॉगिन करने की कोशिश करता है तो वह वेबसाइट में प्रवेश नहीं कर पाता, जिसे ठीक करने में काफी समय लग जाता है।
वेबसाइट डाउन से सबसे ज्यादा नुकसान ई-कॉमर्स साइट को हो सकता है। हैकरों का तोड़ निकालना आसान काम नहीं है। सुरक्षा के मद्देनजर यदि इंटरनेट की स्पीड वन जीबीपीएस हो जाए तो इसे रोका जाए, लेकिन इतनी स्पीड में नेट नहीं चलाया जा सकता।
- अनुज अग्रवाल, साइबर सेल एक्सपर्ट