1. उत्तरदायी एम्बुलेंस प्रणा
संक्रमित मरीज के इलाज के लिए सबसे जरूरी चीज है। उसका सही समय पर अस्पताल पहुंचना। संक्रमण के शुरुआती दिनों में स्वास्थ्य विभाग के पास महज 134 एंबुलेंस थी, जो अब बढ़कर 650 हो गई है। इससे मरीजों को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जा रहा।
2. बेड की संख्या बढ़ाई
राजधानी में मई की शुरुआत में कोविड बेड की संख्या 3700 थी। जिसे अब बढ़ाकर करीब 14000 किया जा चुका है। इससे गंभीर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती होने में कोई परेशानी नहीं हुई और वह समय पर ठीक हो सके।
3. आईसीयू बेड पर ध्यान: जून की शुरुआत में 500 से कम आईसीयू बेड थे, जबकि आज की तारीख में दिल्ली के कोविड अस्पतालों में 2200 से अधिक आईसीयू बेड हैं, जिनमें से लगभग 1400 खाली हैं।
4. व्यापक जांचः 18 जून से पहले प्रतिदिन औसतन 5,500 जांच हो रही थी, जिसे अब बढ़ाकर प्रतिदिन 23 हजार किया जा चुका है। जांच बढाने से समय पर संक्रमितों की पहचान हो जाती है और उन्हें बेहतर इलाज मिलता है।
5. ऑक्सीमीटर: होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को ऑक्सीप्लस मीटर दिए गए। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि अपने नब्ज की निगरानी कर सकें और समय रहते अस्पताल में भर्ती हो सकें।