कुछ देर बाद खुद को ढांढस बंधाते हुए बोलीं, मेरा बेटा पिछले एक साल से लापता है। उसकी कोई खोज-खबर नहीं है। मैं रोज उसे ढूंढ़ने निकलती हूं। एक मां के लिए बेटा चाहे 42 साल का हो या 4 साल का, वह हमेशा बच्चा ही रहता है। उनकी यह बातें, उस मां के 16 महीनों से जारी संघर्ष, इंतजार और उम्मीद की पूरी दास्तान बयां कर रही थी, जो आज भी अपने बेटे के लौट आने की आस में हर सुबह घर से निकल पड़ती है।
अखबारों में छपी हर फोटो में तलाशती हैं अपना बेटा
दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर रोज सुशील कौैर, हाथ में टिफिन और आंखों में उम्मीद लिए निकलती हैं। उम्र 70 साल है, कदम धीमे पड़ चुके हैं, लेकिन बेटे को ढूंढ़ने की जिद अब भी वैसी ही है। उनका 42 वर्षीय बेटा सत्येंद्र सिंह 13 जनवरी 2025 को घर से निकला था और फिर कभी वापस नहीं लौटा। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण परिवार को आशंका है कि वह रास्ता भटक गया होगा। पुलिस में गुमशुदगी दर्ज हुई, तलाश भी हुई, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला।
2023 में हुआ था सत्येंद्र का एक्सीडेंट, बिगड़ गया मानसिक संतुलन
सत्येंद्र के भाई सुरेद्र सिंह ने बताया, कि 2023 में उनकी भाई का कार एक्सीडेंट हुआ था। उनके मुताबिक कार मालिक पत्नी का जन्मदिन मनाकर लौट रहे थे। कार चालक ने शराब पी रखी थी। हादसे में सत्येंद्र की 11 हड्डियां टूट गईं और एक आंख भी चली गई थी। सत्येंद्र सहमा रहने लगा और मानसिक संतुलन भी खो बैठा।