पहली वजह ये कि पुलिस ने सबसे पहले हरकेश नगर स्थित प्रदीप शुक्ला के घर पर घेराबंदी की। कैश वैन से 22.50 करोड़ गोदाम में रखने के बाद वह पत्नी से मिलने गया था, मगर पत्नी घर पर नहीं मिली थी।
पत्नी उस समय बाजार गई थी। वह पड़ोसियों को बोलकर आया था कि उसकी पत्नी को बता देना वह फिर मिलने आएगा।
इसके आने की उम्मीद में ओखला थानाध्यक्ष नरेश सोलंकी ने एक टीम उसके घर के बाहर सादे कपड़ों में तैनात कर दी गई थी। हालांकि वह वहां पर नहीं आया।
कैश वैन वहां काफी देर रुकी रही
दूसरी खास वजह ये कि कैश वैन में जीपीएस लगा हुआ था। पुलिस ने जब कैश वैन की लोकेशन देखी तो कैश वैन विकासपुरी से ओखला आते समय किदवई नगर, ओखला मंडी के पास और ओखला फेज-तीन में रुकी थी।
पुलिस को जीपीएस की लोकेशन से पता लग गया कि आरोपी ओखला मंडी से वैन को ओखला फेज-तीन में ले गया था और कैश वैन वहां काफी देर रुकी रही।
पुलिस को विश्वास हो गया कि आरोपी एक किलोमीटर के दायरे में ओखला में ही कहीं कैश के साथ छिपा हुआ है। इसके बाद डोर टू डोर चेकिंग की गई।
ऐसा चला आरोपी का पता
तीसरी वजह ये थी कि पुलिस प्रदीप के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाल रही थी। नेहरू प्लेस चौकी प्रभारी मनमीत मलिक व एसआई राजेंद्र डागर को पता लगा कि प्रदीप अजीत नाम के व्यक्ति के संपर्क में था।
मोबाइल डिटेल के जरिए पुलिस अजीत तक पहुंच गई। अजीत ने बताया कि उसे प्रदीप रात करीब साढ़े नौ बजे मिला था और काफी खुश नजर आ रहा था। अजीत ने बताया कि वह ओखला फेज-तीन में स्थित एक गोदाम में हो सकता है।
ओखला थानाप्रभारी नरेश सोलंकी, अमर कॉलोनी थानाध्यक्ष अरविंद कुमार, एएटीएस प्रभारी मुकेश कुमार, एसआई मनमीत मलिक, स्पेशल स्टाफ प्रभारी नरेश कुमार, एसआई राजेंद्र डागर और ओखला-दो चौकी प्रभारी गुरजीत की टीम ने आरोपी को रात करीब तीन बजे पकड़ लिया।
गाड़ी के लिए फोन किया था
चौथी वजह ये थी कि आरोपी प्रदीप कैश को लेकर यूपी भागने की फिराक में था। वह बलिया स्थित अपने गांव नहीं जाना चाहता था। उसने गाड़ी के लिए रात को ही फोन कर दिया था। वह बोरियों में नोटों को भरकर यूपी जाने की फिराक में था। 22.50 करोड़ की रकम 500 के नोटों में थी।
संयुक्त पुलिस आयुक्त आरएस कृष्णनईया ने बताया कि प्रदीप शुक्ला ने अचानक वारदात को अंजाम दिया। उसकी पहले से कोई प्लानिंग नहीं थी। उसे यह जानकारी थी कि कैश वैन में आज रकम ज्यादा है। ये उसके प्लान फ्लॉप होने की पांचवी वजह बनी।
हालांकि उसे पता नहीं थी कि वैन में कितनी रकम है। इतनी रकम ही उसके लिए मुसीबत बन गई थी। अगर रकम लाखों में होती तो शायद वह इसे लेकर दिल्ली से भाग जाता।
पांच करोड़ से ज्यादा थी रकम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में एसआईएस कंपनी की लापरवाही सामने आई है। कैश वैन में जहां दो सिक्योरिटी गार्ड होने चाहिए वहां एक ही था। कस्टोडियन भी वैन में नहीं था।
पांच करोड़ से ज्यादा रकम एक वैन में नहीं रखी जा सकती थी। इसके अलावा वैन में लगा जीपीएस बेकार क्वालिटी वाला था। कैश वैन की लोकेशन पता करने में दो घंटे से ज्यादा का समय लग गया था।
सातवीं और आखिरी बड़ी वजह ये रही कि प्रदीप शुक्ला ने करीब 9 माह पहले कैश वैन को सुरक्षित कंपनी के कार्यालय में पहुंचाया था। इस मामले में प्रदीप शिकायकर्ता भी है।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार ग्रेटर कैलाश-एक केजमरूदपुर इलाके में सीएमएस सिक्योरिटी कंपनी की कैश वैन जमरूदपुर इलाके में कैश डालने गई थी। प्रदीप शुक्ला उस कैश वैन का चालक था।
पहले वह सीएमएस सिक्योरिटी कंपनी में काम करता था। यहां पर कैश वैन के गनमैन का एक गाड़ी चालक से पार्किंग को लेकर झगड़ा हो गया था। गनमैन ने फायरिंग कर दी थी। इस दौरान काफी हंगामा होने के बाद प्रदीप शुक्ला कैश वैन को मौके से तुरंत ओखला स्थित कंपनी के कार्यालय में ले गया था। इस मामले में प्रदीप शुक्ला शिकायतकर्ता है।