उत्तरी जिला पुलिस ने सोमवार को 30 करोड़ रुपये के एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। यह कार्रवाई एक दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा की 6,450 रुपये की इंस्टाग्राम शॉपिंग धोखाधड़ी की शिकायत के बाद हुई। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एक छात्रा को इंस्टाग्राम पर कुर्ती के विज्ञापन से ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा। जांच में करीब 200 मोबाइल नंबरों और आईएमईआई का तकनीकी विश्लेषण हुआ। 2,000 किलोमीटर के अभियान के बाद ग्रेटर नोएडा और कानपुर में छापेमारी की गई। छापों में आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, हिमांशु राणा, राहुल कुमार, गौरव पांडे और उदित प्रताप सिंह भदौरिया गिरफ्तार हुए। गिरोह ने फर्जी फर्मों और व्यक्तियों के नाम पर 25 बैंक खाते खोले। इन खातों का उपयोग धोखाधड़ी के पैसे भेजने में होता था। संदिग्ध खातों से 30 करोड़ रुपये से अधिक के क्रेडिट लेनदेन का पता चला। अब तक 27 साइबर धोखाधड़ी शिकायतें इस नेटवर्क से जुड़ी हैं।
एमबीए-योग्य गौरव पांडे गिरोह की मुख्य कड़ी था। वह कमीशन पर साइबर धोखेबाजों को बैंक खाते उपलब्ध कराता था। गौरव अपने सहयोगियों को चालू और बचत बैंक खाते खोलने के लिए 25,000 रुपये मासिक प्रोत्साहन देता था। गिरोह किराए पर परिसर लेता, फर्जी फर्म बनाता और बैंक खाते खोलने के दस्तावेज तैयार करता था। खाता किट और सिम कार्ड हिमांशु राणा व राहुल कुमार एकत्र करते, फिर गौरव पांडे के माध्यम से मैक्सवेल और सॉलिटेयर को उपलब्ध कराते थे।
पुलिस ने बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया। इसमें 20 मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड, 39 पीओएस मशीनें, 33 डेबिट कार्ड, 28 चेक बुक, 15 स्कैनर, 2 लैपटॉप और कई बैंकिंग दस्तावेज शामिल हैं। ग्रेटर नोएडा में छापेमारी के दौरान तीन संदिग्ध फर्मों का भी पता चला। जब्त किए गए सबूतों का विश्लेषण जारी है ताकि अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों से आगे के संबंध स्थापित किए जा सकें।