साल 2018-19 में राजधानी से 600 से ज्यादा बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया। उनके मालिकों से पीड़ितों के पुनर्वास और न्यूनतम मजदूरी के रूप में 30 लाख रुपये वसूले गए।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) तथा सेव दी चाइल्डहुड फाउंडेशन की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने यह जानकारी दी। इन संस्थाओं ने याचिका में बाल मजदूरी रोकने और खत्म करने के लिए अदालत के 2009 के फैसले को लागू कराने का अनुरोध किया था। दिल्ली सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा व चेतन्य गोसाईं ने रिपोर्ट पेश कर कहा कि एक साल में 611 बाल मजदूरों को बचाया गया है। मुक्त कराए गए बच्चों में से 587 को उनके परिवार के पास भेज दिया गया।
सरकार ने कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के संबंध में 10,60,000 रुपये पुनर्वास राशि और उनके नियोक्ताओं से न्यूनतम मजदूरी के रूप में 20,69,563 रुपये वसूले गए हैं। इन बच्चों के बाबत 63 मामले दर्ज किए गए और 43 नियोक्ताओं को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट के समक्ष एनजीओ की ओर से पेश वकील एचएस फूलका ने कहा कि दिल्ली सरकार और पुलिस हाईकोर्ट के 2009 के आदेश को पूरी तरह लागू कराएं।