-स्कूलों को पांच सौ छात्रों पर एक काउंसलर रखना जरूरी होगा
-अब सीनियर सेकेंडरी स्तर पर स्कूल खोलने के लिए कैटेगिरी के हिसाब से बांटा
-स्कूल परिसर में खेल के लिए एरिया कम से कम 2 हजार वर्ग मीटर होना जरूरी
-सीबीएसई ने संबद्धता के अपने नियमों में किया संशोधन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूल खोलने के लिए अब न्यूनतम छ: हजार वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होगी। जबकि स्कूल परिसर में खेल के लिए एरिया कम से कम दो हजार वर्ग मीटर होना जरूरी होगा। पहले आठ हजार वर्ग मीटर जमीन की जरूरत रहती थी। सीबीएसई ने संबद्धता के लिए न्यूनतम भूमि आवश्यकता में संशोधन किया है। इसके साथ ही अब स्कूलों में काउंसलर-वेलनेस शिक्षक व करियर काउंसलर अलग-अलग होंगे। स्कूलों को पांच सौ छात्रों पर एक काउंसलर रखना जरूरी होगा।
कैटेगिरी के आधार पर किया बंटवारा
सीबीएसई ने अपने संबद्धता नियम 3.3 नियम में बदलाव किया है। यह बदलाव स्कूल कैटेगिरी(ए, बी, सी) के आधार पर किया है। पहले के नियम के अनुसार जो स्कूल 8000 वर्ग मीटर की न्यूनतम जरूरत को पूरा नहीं करते हैं, लेकिन उनके पास 6000 वर्ग मीटर से कम जमीन है उन्हें संबद्धता दी जा सकती है। अब सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए सामान्य क्षेत्रों में न्यूनतम 6000 वर्ग मीटर जमीन जरूरी होगी।
जबकि कैटेगिरी बी में सेकेंडरी स्तर के लिए 2400-3200 वर्ग मीटर और कैटेगरी सी में 1600 से 2400 वर्ग मीटर जमीन का प्रावधान किया है। वहीं स्कूल में 2000 वर्ग मीटर का खेल क्षेत्र जरूरी होगा। स्कूल के पास खेल के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने पर उन्हें पास के खेल मैदान, स्टेडियम या पार्क से कम से कम 15 साल के लिए समझौता करना होगा।
काउंसलिंग व वेलनेस टीचर के साथ करियर काउंसलर भी जरूरी
अब स्कूलों में काउंसलिंग व वेलनेस व करियर काउंसलर की भूमिका अलग-अलग होगी। वहीं स्कूलों में करियर काउंसलर भी जरूरी होगा। पांच सौ छात्रों पर एक काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। बोर्ड ने इसके लिए अपने संबद्धता नियम 2018 में संशोधन किया है। अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में काउंसलिंग और वेलनेस शिक्षक जो कि सोशियो-इमोशनल काउंसलर हो और करियर काउंसलर की नियुक्ति होगी। संशोधन के अनुसार सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल को काउंसलर की नियुक्ति दो अलग-अलग भूमिका में करनी होगी। पहला काउंसलिंग और वेलनेस शिक्षक होगा, जबकि दूसरा करियर काउंसलर होगा। काउंसलिंग और वेलनेस शिक्षक के लिए साइकोलॉजी में स्नातक और स्नातकोत्तर होना जरूरी होगा या मानसिक स्वास्थ्य-काउंसलिंग में सोशल वर्क की डिग्री या किसी भी विषय में यूजी-पीजी डिग्री जरूरी होगी।
करियर काउंसलर के लिए ह्यूमैनिटीज, साइंस, सोशल साइंस,मैनेजमेंट,एजुकेशन या टेक्नोलॉजी में स्नातक की डिग्री जरूरी होगी। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि दोनों के लिए शिक्षक को कम से कम पचास घंटे कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम के भी पूरे करने होंगे। करियर काउंसलर का काम छात्रों को करियर, कॉलेज, कोर्स और भविष्य की योजनाओं के बारे में गाइड करना होगा। जहां करियर काउंसलर नहीं होंगे वहां अस्थायी रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों को नामित किया जा सकता है। लेकिन उस शिक्षक को तय योग्यता को दो सत्रों के अंदर पूरा करना होगा। मालूम हो कि वर्तमान के नियमों के अनुसार सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्तर पर ही शिक्षक काउंसलिंग और वेलनेस शिक्षक के रूप में नियुक्त होता है। जिन स्कूलों में नौवीं से बारहवीं के छात्रों की संख्या 300 से कम है, वहां पार्ट-टाइम काउंसलर रखने की अनुमति थी। पहले काउंसलर और छात्र अनुपात तय नहीं था।