दिल्ली-एनसीआर में गौतमबुद्ध नगर की ट्रैफिक पुलिस की हालत सबसे बुरी है। नियमों को तोड़कर वाहन दौड़ाने वालों के हौसले बुलंद हैं। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए हाईवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एचटीएमएस) जैसी वर्ल्ड क्लास सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन नोएडा ट्रैफिक पुलिस की जमीनी हकीकत शून्य है। यहां पर एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी 6 हजार से ज्यादा वाहनों को संभालता है।
इतना ही नहीं जिस जिले में हर वक्त छह लाख वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं, वहां संसाधन के नाम पर ट्रैफिक पुलिस के पास महज एक इंटरसेप्टर और चार स्पीड रडार हैं। फोर्स की बात करें तो एसपी ट्रैफिक व ट्रैफिक इंस्पेक्टर मिला कर कुल 130 लोग है। दिल्ली से सटा नोएडा उत्तर प्रदेश का वो शहर है, जहां से राज्य को सबसे ज्यादा राजस्व मिलता है, लेकिन फिर भी इस शहर को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नतीजतन, एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों को भी जाम में फंसना पड़ जाता है, जिसके चलते जिंदगी खतरे में पड़ जाती हैं।
--ट्रैफिक पुलिस--
- इंटरसेप्टर- 1
- स्पीड रडार- 4
- ट्रैफिक पुलिस वाहन- 4
- एसपी ट्रैफिक- 1
- ट्रैफिक इंस्पेक्टर- 1
- टीएसआई- 4
- हेड कांस्टेबल- 32
- कांस्टेबल- 92
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6 लाख से ज्यादा वाहन
एसपी ट्रैफिक राजीव मिश्र के मुताबिक, यहां 6 लाख से ज्यादा वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं। इनमें हेवी व लाइट मोटर व्हीकल भी शामिल हैं। हैरत की बात तो यह है कि कुल 130 लोगों के हवाले इनको संभालने का जिम्मा है। इनमें 100 से कम ट्रैफिक सिपाही नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी, जेवर और दनकौर तक की व्यवस्था संभालते हैं। कुछ छुट्टी पर तो कुछ वीआईपी आगमन के कारण सड़कों पर तैनात नहीं होते।
--सूरत-ए-हाल--
--दिल्ली--
वाहनों की संख्या- 86 लाख
ट्र्ैफिक पुलिस- 5 हजार
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-गुड़गांव-
वाहनों की संख्या- 5 लाख
ट्रैफिक पुलिस- 300
-गाजियाबाद-
वाहनों की संख्या- 8 लाख
ट्रैफिक पुलिस- 200
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फरीदाबाद-
वाहनों की संख्या- 2.50 लाख
ट्रैफिक पुलिस- 120
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गौतमबुद्ध नगर-
वाहनों की संख्या- 6 लाख
ट्रैफिक पुलिस- 130
एंबुलेंस व दमकल वाहन को नहीं देता कोई साइड
दादरी में शनिवार को एंबुलेंस के जाम में फंसने से बुलंदशहर निवासी छह साल का प्रियांशु समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सका और उसकी मौत हो गई। इस शहर में एंबुलेंस व दमकल की गाड़ियां वाहनों से साइड लेने के लिए सायरन बजाती रहती हैं, लेकिन किसी के कान पर जू तक नहीं रेंगती। ऐसे में एंबुलेंस सवार मरीज की मृत्यु तक हो जाती है। इसी कारण आग लगने वाली जगह पर दमकल की गाड़ी देर से पहुंचती है। इसकी मूल वजह यह भी है कि यहां पर ट्रैफिक पुलिस एंबुलेंस और दमकल जैसे वाहनों का रास्ता अवरुद्ध करने वाले वाहनों का चालान नहीं करती, जबकि दिल्ली में ऐसे वाहन चालकों से सख्ती से निपटा जाता है और उन वाहनों का 2 हजार का चालान होता है।
शाम ढलते ही निरंकुश हो जाती है ट्रैफिक पुलिस
जब तक दिन होता है, तब तक तो वाहन चालकों में थोड़ा बहुत ट्रैफिक पुलिस का डर बना रहता है। उन्हें लगता है कि अगर वाहन तेज गति में दौड़ाएंगे तो ट्रैफिक पुलिस इंटरसेप्टर व स्पीड रडार के माध्यम से चालान कर देगी। मगर शाम होते ही यह दोनों ही संसाधन काम नहीं करते हैं, क्योंकि इनकी विजिबिलिटी नहीं होती है। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि ऐसे में कर्मचारियों का ही सहारा लेना पड़ता है। नियम तोड़ने वाले वाहनों को पकड़कर चालान किए जाते हैं।