डॉक्टरों का कहना है कि स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने को हैं। ऐसे में बच्चे अधिकतर समय घरों पर रहेंगे। छोटे बच्चे ज्यादा नटखट होते हैं और उनका स्वभाव बालकनी, सीढ़ी व ऊंची जगहों पर खेलने का होता है। वह बार-बार उसकी तरफ जाते हैं, ऐसे समय में अभिभावकों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। यदि अभिभावक इन्हें ऊंचाई की तरफ जाने से रोक लेते हैं तो दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकता है। एम्स के न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता का कहना है कि पिछले पांच माह में एम्स के ट्रामा सेंटर में 50 बच्चे भर्ती हुए।
औसतन 10 बच्चे हर माह सिर में लगी गंभीर व मध्यम चोट के कारण अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। इनमें से 20 फीसदी मरीज उपचार के दौरान दम तोड़ देते हैं। उनका कहना है कि देखा गया कि यहां आने वाले ज्यादातर बच्चे 10 फीट से कम की ऊंचाई से गिरे हैं। ऊंचाई से गिरकर चोटिल होने वाले इन मामलों को रोका जा सकता है। अभिभावकों को इसका विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
अधिकतर घरों की बालकनी के सहारे बच्चे
दिल्ली में बढ़ती भीड़ में फ्लैट सिस्टम तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों के पास खेलने के लिए बालकनी ही उपलब्ध रहती है। दिल्ली में लाखों की संख्या में फ्लैट हैं और बच्चे अक्सर इनकी बालकनी में ही दिखते हैं।
छोटे बच्चे होते हैं ज्यादा नटखट
18 माह से सात साल के बच्चे ज्यादा नटखट होते हैं। एम्स में ट्रामा सेंटर में आए बच्चों के आंकड़े बताते हैं कि इस उम्र के बच्चे बालकनी की तरफ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। पिछले साल 18 माह की महिरा और सात साल की मानसी की मौत बालकनी से गिरकर हुई। दोनों बच्चों ने अंगदान किए थे। डॉक्टरों का कहना देखा गया है कि लड़कियों के मुकाबले लड़के ज्यादा नटखट होते हैं। एम्स के ट्रामा सेंटर में रोजाना औसतन तीन बच्चे भर्ती रहते हैं।