हेरफेर कर संपत्तियों को ठिकाने लगाने वाले जीडीए बाबुओं और प्रापर्टी डीलरों को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने जोर का झटका दिया है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की तर्ज पर जीडीए ने भी अपनी संपत्तियों को आवंटन के पांच साल तक बेचने पर रोक लगा दी है। हालांकि फिलहाल यह रोक ईडब्लूएस फ्लैट्स पर लागू होगी। जीडीए की वेबसाइट पर भी नए नियम को अपलोड कर दिया गया है।
गाजियाबाद में जमीन की ऊंची कीमतों के चलते निम्न और मध्य आय वर्ग के लिए घर का सपना दिनोंदिन महंगा होता जा रहा है। इस स्थिति में प्रापर्टी डीलरों की चालबाजी आम आदमी के लिए घर मिलने की राह में बड़ा रोड़ा साबित होती है।
प्रापर्टी डीलर अपने एजेंटों के जरिए आवेदन करा देते हैं और आवंटन मिलने पर फ्लैट को ऊंचे दाम में बेच देते हैं। कई बार आवंटियों को अतिरिक्त रकम चुकाकर ईडब्लूएस मकान खरीद लेते हैं।
इस काम में जीडीए बाबुओं की भी मिलीभगत रहती है। ऐसी स्थिति में वास्तविकता में घर की जरूरत वाले लोगों को अवसर नहीं मिल पाता।
जीडीए संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि जरूरतमंदों को ही मकान मिलें, इसके लिए नए नियम को लागू किया गया है।
वर्तमान में इंद्रप्रस्थ योजना में निकाले गए 1024 ईडब्लूएस फ्लैट्स की स्कीम में नया नियम लागू होगा। आवंटन मिलने के पांच वर्षों तक फ्लैट्स का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।