लॉकडाउन से परेशान प्रवासी मजदूरों को ठगने वाले भी तेजी सक्रिय हो गए है। बवाना पुलिस ने मंगलवार को ऐसे ही जालसाजों का खुलासा किया है, जो प्रवासी मजदूरों को फर्जी ई-पास बेचकर उन्हें बिहार भेजने के काम में लगे थे। आरोपी मजदूरों से प्रत्येक पास का 5200 रुपये वसूल रहे थे। पास पर हरियाणा के पानीपत के डीसी का फर्जी हस्ताक्षर थे। पकड़े गए आरोपियों के नाम नामू प्रसाद, राकेश मोहन, कृष्ण मोहन, शंकर चौधरी और मोहित नागपाल है।
बाहरी उत्तरी दिल्ली के डीसीपी गौरव शर्मा ने बताया कि मंगलवार देर रात गश्त कर रहे बवाना थाने के एएसआई नरेंद्र, कांस्टेबल दिनेश और संदीप ने बरवाला ट्रैफिक सिग्नल के पास यात्रियों से भरे दो ऑटो को जांच के लिए रोका। दोनों ऑटो में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के 24 प्रवासी मजदूर सवार थे। ये सभी पानीपत से आ रहे थे। जांच के दौरान ऑटो चालकों ने पानीपत डीएम की ओर से जारी एक ई-पास दिखाया।
शक होने पर पुलिस ने पास पर बने क्यूआर कोड को स्कैन किया तो वह फर्जी दिख रहा था। इस पर पुलिस ने ऑटो चालकों का मोबाइल लेकर खंगाला तो उसमें पास की साफ्ट कॉपी थी। मोबाइल में सभी पास अलग-अलग व्यक्ति के नाम से जारी हुआ था। जारी पास में ज्यादातर नाम मोहित कुमार के नाम से था। बवाना पुलिस ने ऑटो चालकों को हिरासत में लेकर पानीपत के जिला प्रशासन कार्यालय से पास की पुष्टि की तो वहां से ऐसा कोई भी पास जारी होने से इनकार कर दिया गया। चालक की निशानदेही पर पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को दबोच लिया।