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5 तारीखों के चलते है केजरीवाल-जंग के बीच 'जंग'

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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और उप-राज्यपाल नजीब जंग के बीच विवाद के चलते एक नया संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। एक ओर जहां इस विवाद का असर सरकारी कामकाज पर पड़ रहा है, वहीं इसके चलते कोई भी प्रशासनिक अधिकारी दिल्ली में पोस्टिंग न हो इसकी कोशिश करने लगा है।
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केजरीवाल और नजीब जंग के बीच शुरु हुआ विवाद अब काफी उग्र हो चुका है और मामला राष्ट्रपति तक पहुंच गया है। असल में नजीब जंग से केजरीवाल का विवाद कोई नई बात नहीं है।

पिछले साल आप की सरकार गिरने के बाद से ही एलजी पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उनकी वजह से ही दिल्ली में एक साल तक सरकार नहीं बन सकी क्योंकि उन्होंने दिल्ली में विधानसभा भंग करने और फिर से चुनाव कराने की सिफारिश नहीं की।
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विवाद बढ़ने के साथ ही मामले में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया। कोर्ट ने दिल्ली में सरकार बनाने के एलजी के प्रयासों की तारीफ भी की। लेकिन इस बार दिल्ली में सीएम और नजीब जंग के बीच खींचतान की असल वजह एक अधिकारी का छुट्टी पर जाना है।

असल में दिल्ली के मुख्य सचिव केके शर्मा 14 से 24 मई तक छुट्टी पर हैं। चूंकि मुख्य सचिव का पद एक दिन से ज्यादा खाली नहीं रह सकता इसलिए तुरंत ही कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति आवश्यक थी।

ऐसे में दिल्ली सरकार के सेवा विभाग ने वरिष्ठता के आधार पर जिन अधिकारियों की सूची सरकार को भेजी एलजी ने उस लिस्ट में से शकुंतला गैमलिन को कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्ति करने का फैसला किया और यहीं से शुरु एक नया विवाद।

15 मई को शुरु हुआ विवाद

असल में केजरीवाल सरकार गैमलिन की नियुक्ति के खिलाफ थी। बावजूद इस असहमति के 15 मई को उपराज्यपाल ने गैमलिन को कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया।

यहीं से शुरु हुई केजरीवाल और नजीब जंग के बीच एक नई लड़ाई। एलजी के आदेश को चुनौति देते हुए आप सरकार ने इसे असंवैधानिक कहा। सरकार ने आरोप लगया कि एलजी जीएनसीटी एक्ट और ट्रांजेक्‍शन एंड बिजनेस रूल का उल्लंघन कर रहे हैं।

इसके जवाब में नजीब जंग ने संविधान की धारा 234 AA का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में एलजी ही सरकार का प्रतिधित्व करते हैं इसलिए उन्होंने जो भी किया है वह पूरी तरह से संवैधानिक है।

16 मई: प्रधान सचिव पर मचा बवाल

इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शकुंतला गैमलिन से कहा कि मुख्य सचिव का पद ग्रहण न करें क्योंकि यह नियुक्ति नियमों के खिलाफ की गई है।

इसके बावजूद प्रधान सचिव (सेवा) अनिंदो मजूमदार ने एलजी के आदेश पर शकुंतला की नियुक्ति का आदेश पत्र जारी कर दिया। इससे नाराज मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रधान सचिव (सेवा) अनिंदो मजूमदार को ही उनके पद से ‌हटा दिया।

एलजी ने इस मामले में भी हस्तक्षेप किया और मजूमदार के ट्रांसफर को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।

17 मई: केजरीवाल ने सार्वजनिक मंच से लगाया आरोप

गैमलिन की नियुक्ति और मजूमदार के ट्रांसफर पर रोक से बौखलाए सीएम केजरीवाल ने रविवार को ऑटो संवाद में दिल्ली के ऑटो वालों को संबोधित करते हुए शकुंतला पर गंभीर आरोप लगाए।

केजरीवाल ने कहा कि शकुंतला रिलायंस की दो बिजली कंपनियों का पक्ष ले रही थीं। वह इन दोनों कंपनियों को 11000 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाना चाहती थीं।

इसके साथ ही केजरीवाल ने केद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह दिल्ली सरकार के कामकाज में टांग अड़ाने की कोशिश कर रही है।

18 मई: केजरीवाल को चिट्ठी लिख जताया गुस्सा

इस बीच दिल्ली सरकार ने शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति का आदेश जारी करने वाले सचिव अनिंदो मजूमदार की जगह राजेंद्र कुमार को प्रधान सचिव नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।

मजूमदार अपने ऑफिस में प्रवेश न कर सकें इसलिए सरकार ने सचिवालय के उस कार्यलय पर ताला जड़वा दिया जिसमें मजूमदार बैठते थे।

इस बीच उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एलजी को पत्र लिख कर कहा कि नजीब जंग का फैसला संविधान के खिलाफ है।
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19 मई: केजरीवाल से पहले जंग पहले राष्ट्रपति के पास

इस बीच इस पूरे मामले पर अपनी आपत्ति जाहिर करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा। राष्ट्रपति ने केजरीवाल को 19 मई को मिलने के लिए बुलाया।

लेकिन इसी बीच खबर आई कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। मंगलवार को एलजी को मुख्यमंत्री केजरीवाल से पहले राष्ट्रपति से मिलने का समय मिल गया।

अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे मामले को राष्ट्रपति किस तरह से निपटाते हैं।
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