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इस बार केजरीवाल रहे 49 दिन पर नॉटआउट

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आप की नई सरकार में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, पूर्ण राज्य का दर्जा, कानून व्यवस्था, वायु प्रदूषण, मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार से टकराव रहा।
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वहीं कानून-पुलिस और भूमि की फाइलें सीधे उपराज्यपाल को नहीं भेजे जाने, कार्यवाहक मुख्य सचिव बिना पूछे बनाए जाने व मजिस्ट्रेट जांच बिना अनुमति घोषित करने पर नजीब जंग से लड़ाई जारी है।

इसके अलावा शुगर व ब्लड प्रेशर की दिक्कत दूर करने बंगलूरू जाने के बाद पार्टी पदाधिकारियों के साथ वर्चस्व की जंग भी इस 49 दिन में झेलनी पड़ी है।

फैसले सुधारने में गुजरे 49 दिन

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार को अपने पिछले 49 दिन के कार्यकाल में लिए गए फैसले सुधारने में 49 दिन गुजर गए।

बिजली-पानी सब्सिडी, शहीदों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, अनुबंधित कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकालने, तोड़फोड़ रोकने के फैसले पिछली सरकार में भी लिए थे।

लेकिन जल्दबाजी में पॉलिसी फ्रेम में दिक्कतें थीं। यही वजह है कि सभी फैसलों को स्ट्रीमलाइन करके फिर से उस पर मुहर लगाई जा रही है। वहीं अपने विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सरकार में पद और जगह भी इस बार बनाई गई।

बिजली पर संभल कर लिया फैसला

केजरी सरकार ने पिछली सरकार में बिजली के दाम आधे करने और पानी 20 हजार लीटर तक माफ करने में बजट प्रावधान थोड़े समय के लिए किया था। अबकी बार एक साल के लिए लेखानुदान मे प्रावधान किए।

शहीदों की पॉलिसी में दिल्ली के बाहर वर्दीधारी के शहीद होने पर मुआवजा दिए जाने के अलावा होमगार्ड और सिविल डिफेंस को भी शामिल किया।

दिल्ली में तोड़फोड़ रोकने का आदेश और अनुबंधित कर्मचारियों को नहीं हटाने के आदेश में पिछली सरकार की तरह दिक्कतें जरूर बरकरार हैं। अनधिकृत कॉलोनी नियमन का मामला भी कुछ इसी तरह का है।

इस बार नहीं लगाया जनता दरबार

बाउंड्री करने के बाद रजिस्ट्री शुरू करने की घोषणा की और बुक प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री शुरू करने की घोषणा कर दी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पा रहा है।

आप सरकार दिसंबर 2013 में बनी और 14 फरवरी, 2014 तक चली पिछली सरकार में जनता दरबार सचिवालय पर बुलाकर जान आफत में डाली तो इस बार अभी तक बड़े स्तर का जनता दरबार नहीं लगाया।

अभी पब्लिक ग्रीवांस मैनेजमेंट सिस्टम में कर्मचारी व अधिकारियों की नियुक्ति का काम चल रहा है। इसी तरह से एंटी करप्शन ब्रांच में पद और बजट बढ़ाने की घोषणा के बाद रविवार को हेल्पलाइन फिर से री-लांच की जा रही है।

‘जनलोकपाल पर सरकार चुप’

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद विभाग न रखकर सरकार का नया मॉडल दिया तो 21 संसदीय सचिव बनाकर सबको संतुष्ट करने का रास्ता भी दिखाया।

लेकिन लोकपाल और स्वराज कानून के मुद्दे पर सरकार छोड़ने वाले अरविंद केजरीवाल की टीम ने नई पारी में कुछ साफ नहीं किया है।

‘आप’ से निष्कासित पूर्व विधायक राजेश गर्ग ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। गर्ग ने सवाल किया है कि जिस जनलोकपाल कानून को सरकार सबसे अहम मानती थी, इस बार 49 दिन के शासन में उस पर कोई बात ही नहीं हो रही है।

गर्ग का कहना है कि पिछली बार कहा जाता था कि बहुमत न होने से हम जनलोकपाल बिल पास नहीं करा सके, जबकि कानून को लागू नहीं करा सके, लेकिन इस बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार ने जनलोकपाल बिल पर चुप्पी साध रखी है।
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निष्क्रियता भरे रहे 49 दिन

आप सरकार 49 दिनों में केंद्र,उपराज्यपाल पार्टी नेताओं से लड़ती नजर आई। जिन्होंने प्रचंड बहुमत दिया, उनके लिए काम नहीं किए। कम राजस्व आया जिससे योजना मद की राशि घटी, अब कई काम रुकेंगे।

पार्टी के आंतरिक लोकपाल हटाकर मजबूर लोकपाल बना दिया। मोबाइल से स्टिंग की बात करने वाले पार्टी की काउंसिल मीटिंग में मोबाइल बाहर रखवाते हैं। यही लोकतंत्र और पारदर्शिता है। -अजय माकन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

49 दिन का शासन निष्क्रियता भरा रहा। दोनों बार के शासन में जनता को सिर्फ धोखा मिला है। बिजली के दाम आधे और पानी के बिल माफ करने के वादे के साथ सत्ता शिखर तक पहुंचे, मगर सत्ता में आते ही आंकड़ों की बाजीगरी से खेला।

दिल्ली में कोई जनहितकारी विकास कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। लोकायुक्त की नियुक्ति जैसे मसले अधर में हैं। मुख्यमंत्री अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने में मस्त हैं।-सतीश उपाध्याय़ (प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष)
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