किसी जमाने में ऐश की जिंदगी जीने वाले की मौत घुट-घुट कर होगी यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। साइबर सिटी में 11 साल पहले सिटी बैंक में 460 करोड़ के घोटाले के मास्टर माइंड शिवराज पुरी की क्षय रोग (टीबी) से दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान बृहस्पतिवार को मौत हो गई। कमिश्नरी की पुलिस ने उस पर अलग-अलग तीन धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए थे।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में 22 करोड़ से अधिक के जमीन घोटाले में सिहानी गेट थाने में दो और एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसमें तत्कालीन राजस्व कर्मी, सब रजिस्ट्रार समेत आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जमीन के दस्तावेजों में हेरेफेर करने का मामला दर्ज हुआ है।
आरोप है कि 2016 में एक्सप्रेसवे के लिए रसूलपुर सिकरोडा में निष्प्रभावी हो चुकी समितियों ने 22 करोड़ से अधिक मुआवजा ले लिया। इसमें अशोक सहकारी समिति, अशोक सहकारी खेती समिति, अशोक गृह निर्माण समिति और अशोक संयुक्त सहकारी समिति शामिल है। दिल्ली के सफदरजंग एंक्लेव निवासी अरुण कुमार ने फर्जी रूप से समितियों का दोबारा से गठन कर धारा थ्रीडी लागू होने के बाद अपने परिवार के लोगों, और अपने जानकारों के नाम जमीन का बैनामा करा कर मुआवजा ले लिया।
नवयुग मार्केट निवासी दवा कारोबारी अनिल गुप्ता ने दिल्ली निवासी नेम सिंह यादव पर चार बीघा जमीन का लैंड यूज बदलवाने और सरकारी विभाग से नक्शा कराने के नाम पर 57 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है।
अनिल का कहना है कि नेम सिंह यादव ने 11 करोड़ रुपये में जमीन का सौदा कराया था। इसके बाद नेम सिंह ने साढ़े चार करोड़ रुपये का खर्चा बताकर डीडीए से जमीन का लैंड यूज आवासीय में कराने व नक्शा पास कराने का झांसा दिया। जिसमें से उसने दो बार में 57 लाख रुपये ले लिए। आरोप है कि रुपये लेने के बाद नेम सिंह ने ना नक्शा पास कराया और ना ही रुपये वापस लौटाए। कुछ समय बाद उसने अपने खाते का चेक दे दिया जो बैंक खाते में लगाया तो बाउंस हो गया। मामले में अनिल गुप्ता ने नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। संवाद