प्राधिकरण एक ओर अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। वहीं, आवासीय प्लॉट विभाग उन प्लॉट को स्कीम में नहीं ला रहा है, जो कई वर्षों पहले निरस्त हो चुके हैं। ऐसे में प्राधिकरण को राजस्व की हानि हो रही है। अब प्राधिकरण ऐसे प्लॉट का सर्वे कराकर स्कीम में लाएगा।
प्राधिकरण के ओएसडी डॉ. संतोष उपाध्याय ने बताया कि पहले चरण में ऐसे 250 प्लॉट का पता लगाया गया था, जो किसी न किसी कारणों से निरस्त हो चुके थे, लेकिन यह फाइलों से बाहर नहीं निकल रहे थे। इसके बाद सभी वर्क सर्किल में इसे अभियान के तौर पर चलाया गया तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।
सर्वे में पता चला कि निरस्त होने के बाद ऐसे 400 से ज्यादा प्लॉट की फाइलें दबी पड़ी हैं, जिन्हें स्कीम में लाकर आवंटन कराना चाहिए था, ताकि जनता को इसका लाभ मिल सके। इन प्लॉटों के आवंटन से प्राधिकरण को राजस्व का लाभ भी होता। ऐसा क्यों नहीं किया गया। यह जांच का विषय है।
200 प्लॉटों पर विवाद
प्राधिकरण ने जब सर्वे कराया तो 400 तो ऐसे प्लॉट सामने आए, जो नियमों को पूरा नहीं करने की वजह से निरस्त हो गए। वहीं इसके अलावा 200 प्लॉट ऐसे भी मिले, जो निरस्त हो चुके हैं और इन पर किसी न किसी वजह से विवाद है। इनमें से कुछ प्लॉट का मामला कोर्ट में भी है। ऐसे में प्राधिकरण इन मामलों में हाथ नहीं डाल सकता, लेकिन कोर्ट के इतर मामलों को प्राधिकरण हल कर इन प्लॉटों को भी स्कीम में ला सकता है। इससे प्राधिकरण को फायदा होगा।
2004 से निरस्त होकर दबी हैं फाइलें
प्राधिकरण के अधिकारी का कहना है कि करीब 30 फाइलें 2004 से 2008 के बीच की है। यह प्लॉट उस दौरान निरस्त हो चुके हैं। इसमें कुछ प्लॉटों के दोबारा आवंटन के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन इसके बाद आवंटी ने कोशिश नहीं की और ऐसे प्लॉट वैसे के वैसे ही पड़े हुए हैं।
संस्थागत प्लॉट का भी चल रहा सर्वे
अधिकारियों की मानें तो संस्थागत के भी प्लॉट का सर्वे चल रहा है। सर्वे के बाद इसमें भी बड़े पैमाने पर खामियां निकलकर सामने आ सकती हैं। इस बाबत प्राधिकरण बाद में जानकारियां उपलब्ध कराएगा।