ग्रेटर नोएड में लावारिस कुत्तों व बंदरों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि डाढा गांव, दादरी, बिसरख, जेवर व दनकौर में बने सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कुत्ते-बंदरों के हमले से घायल 400 लोग रोजाना पहुंच रहे हैं। अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो रोजाना 250 नए मरीजों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। जबकि बाकी दूसरी और तीसरी बार टीका लगवाने पहुंच रहे हैं।
| स्थान | कुल मरीज (करीब) | नए मरीज (करीब) |
| जेवर | 90 | 48-60 |
| दनकौर | 90 | 50-60 |
| दादरी | 82 | 46-55 |
| बिसरख | 80 | 40-50 |
| डाढा गांव | 90 | 60-70 |
रैबीज इंजेक्शन लगवाना है तो सिरिंज परचून की दुकान पर मिलेंगी
ग्रेटर नोएडा के डाढा गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉग बाइट के मरीजों को एंटी रैबीज इंजेक्शन के टीके की व्यवस्था है। जबकि अस्पताल में सिरिंज की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को बाहर परचून की दुकान से खरीदकर लगवानी पड़ रही है। इसके लिए मरीजों को दस रुपये अदा करने होते है। डाढा गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुत्ते काटने से इलाज के लिए पहुंचे मिथलेश का कहना है कि सिरिंज परचून की दुकान से दस रुपये में खरीदकर लानी पड़ रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि सीएमओ कार्यालय से महीने में दो बार सिरिंज मिलती है। जितनी आती है उनसे मरीजों को टीका लगाया जाता है। स्वास्थ्य केंद्र के लिए सीएमओ से महीने में 800 से 1000 सिरिंज मिलती हैं। अस्पताल में सिरिंज की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मांग की गई है।