दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों, जेजे क्लस्टर व ग्रामीण इलाके में बिना इजाजत बने घरों व व्यावसायिक इमारतों पर बुलडोजर चलने का खतरा टल गया है। केंद्र सरकार से इसके लिए बने अस्थायी कानून की अवधि तीन साल बढ़ा दी है। ऐसे में इन इमारतों को सुरक्षा कवच मिल गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस बीच डीडीए व एमसीडी इन मकानों को नियमित करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर लेंगी। इससे भविष्य में इनके टूटने का खतरा नहीं रहेगा।
दरअसल, दशकों से अनधिकृत कालोनियों में बड़े पैमाने पर निर्माण बिना कानूनी मंजूरी के लिए किए जाते रहे हैं। इन निर्माणों पर तोड़फोड़ या सीलिंग होने का खतरा हमेशा बना रहता है। 2008 में केंद्र सरकार ने इनको संसद के एक कानून से अस्थायी तौर पर सुरक्षा कवच मुहैया कराया था। सरकार ने 2008 में दिल्ली स्पेशल प्रोविजन एक्ट से एक साल के लिए इस तरह के निर्माण को राहत दी। उस वक्त अवधि एक साल की रखी गई थी। बाद में इसे तीन बार एक-एक साल के लिए बढ़ाया गया।
2011 में अस्थायी कानून को तीन साल के लिए बढ़ा दिया। 2014 में इसकी अवधि 31 दिसंबर 2020 तक के लिए बढ़ा दी गई थी। हर बार कानून बढ़ाते वक्त सरकार की तरफ से दलील रही है कि इस बीच कानों का नियमित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, लेकिन अलग-अलग वजहों से बीते करीब 12 सालों में यह संभव नहीं हो सका है। माना जाता है कि करीब चालीस लाख आबादी इसकी जद में आती है।
मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बार कॉलोनियों का तेजी से नियमन केंद्र सरकार कर रही है। पीएम उदय पोर्टल पर अभी तक करीब 3.62 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया है। वहीं, .27 लाख से ज्यादा संपत्तियों का जियो सर्वे व 2,821 लोगों को अथराइजेशन स्लिप और कन्वेंश डीड दे दी गई है। अगले तीन साल में सरकार की योजना दिल्ली की सभी कॉलोनियों को नियमित कर देने की है। इससे किसी मकान पर टूटने का खतरा नहीं रहेगा।
शीतकालीन सत्र न होने से लाना पड़ा अध्यादेश
एक्ट की अवधि पूरी होने पर हर बार डीडीए अपने बोर्ड बैठक में मंजूरी देकर उसे केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजता है। समय बढ़ जाने से मकानों को सुरक्षा मिल जाती थी। इस बार में भी डीडीए बोर्ड ने प्रस्ताव पास कर केंद्र के पास भेज दिया था। लेकिन इस बार दिक्कत शीतकालीन सत्र न होने से आई है। सरकार को इस वजह से तीन साल के लिए अध्यादेश लाना पड़ा है। इससे अनधिकृत कालोनी, जेजे क्लस्टर व दिल्ली देहात के मकानों व व्यावसायिक इमारतों को सुरक्षा मिल गई है।