चार लड़कियों के गायब होने के मामले में शहीद नगर स्थित आशा निकेतन बाल गृह का प्रबंधन शक के दायरे में है। अभी तक की जांच में बेहद लापरवाही सामने आई है। बाल गृह की तरफ से लड़कियों के गायब होने के चार दिन बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इतना ही नहीं, बाल गृह की तरफ से इसकी जानकारी विभाग या प्रशासन को देना भी मुनासिब नहीं समझा।
डी-81 शहीदनगर स्थित आशा निकेतन बाल गृह से 31 जुलाई को चार लड़कियां गायब हुईं, लेकिन तीन अगस्त को बाल गृह की तरफ से साहिबाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। सोमवार को जांच करने के अपर नगर मजिस्ट्रेट ने वार्डन से लेकर तमाम लोगों से पूछताछ की। उनसे पूछा गया कि इतने गंभीर मामले में चार दिन के बाद थाने में रिपोर्ट लिखवाने के पीछे क्या वजह थी? इसकी जानकारी जिला प्रोबेशन कार्यालय या फिर प्रशासनिक स्तर पर किसी अन्य अधिकारी को दी गई। इन तमाम सवालों पर वार्डन व संचालक कोई जवाब नहीं दे पाए।
ऐसे में मामले को गंभीर मानते हुए मजिस्ट्रेट ने अलग से जांच की सिफारिश की। उधर, जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी के आदेश पर सारे मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है। अभी तक की जांच में बाल गृह प्रबंधन की भूमिका को संदिग्ध माना जा रहा है। अब मजिस्ट्रेट जांच में देखा जा रहा है कि अभी तक आशा निकेतन से लड़कियों के भागने के कितने मामले हुए हैं। उनमें एफआईआर कब दर्ज कराई गई। लड़कियों के गायब होने की सूचना नियमित रूप से जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय को दी गई या नहीं। अगर पुराने मामलों में भी इसी तरह की गड़बड़ी मिलती है तो प्रशासन की तरफ से बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
कोई नहीं दे रहा नियमित जानकारी
नियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु वर्ग के लड़क व लड़कियों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश करना होता है। उसके बाद जिस भी बाल गृह में रखे जाने की व्यवस्था की जा रही है। उसकी नियमित जानकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी को दिया जाना जरूरी है लेकिन हैरत की बात यह है कि जिले में संचालित नौ बाल संप्रेक्षण गृहों में से चुनिंदा की तरफ से जानकारी दी जा रही थी। बाकी सभी अपने मनमर्जी से बच्चों को रख रहे थे। जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्रा का कहना है कि आशा निकेतन ने लड़कियों के गायब होने की कोई जानकारी नहीं दी। पुलिस को भी चार दिन बाद जानकारी दी गई। अब मजिस्ट्रेट जांच के बाद जो भी निकलकर आएगा उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।