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Delhi NCR News: वीजा दिलवाने के नाम पर ठगी में दो रूसी नागरिक समेत 4 गिरफ्तार

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अपराध शाखा की साइबर सेल ने आरोपियों को दबोचा
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पटेल नगर में फर्जी वीजा कंसल्टेंसी चला रहे थे,
63 बेरोजगारों से ठगी का पता चला, आरोपियों के पास से 1400 यूएस डॉलर समेत कई सामान बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अपराध शाखा की साइबर सेल ने पोलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, लक्ज़मबर्ग जैसे देशों में वर्क परमिट वीजा दिलवाने का झांसा देकर ठगी में दो रूसी नागरिकों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इन लोगों ने देशभर के सैकड़ों लोगों के साथ ठगी की। फिलहाल 63 लोगों के ठगे जाने का पता चला है। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, चार पासपोर्ट, दो क्यूआर कोड, 35 फर्जी ऑफर लेटर, कुछ रिज्यूम, 76 हजार कैश और 1400 यूएस डॉलर बरामद किए हैं।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान दो रूसी नागरिक इगोर सिरेंको, अर्टेम टोल्काचेव और दो भारतीय युवक सागर शर्मा और रोहित के रूप में हुई है। आरोपियों ने मध्य दिल्ली के पटेल नगर इलाके में डब्ल्यूजीए वीजा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम से वीजा कंसल्टेंट एजेंसी खोली हुई थी। सागर और रोहित इनके यहां सैलरी पर काम करते थे। पुलिस से बचने के लिए इगोर सिरेंको ने बलजीत नगर के रहने वाले एक ऑटो चालक सज्जन सिंह के नाम से कंपनी खोली हुई थी। सज्जन को पंद्रह फीसदी का पार्टनर बनाकर उसे डायरेक्टर भी बनाया हुआ था। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर इनके बाकी साथियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
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अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त राकेश पावरिया ने बताया कि पिछले दिनों महाराष्ट्र, नागपुर के रहने वाले योगेश गिरधारी गहाने ने 75 हजार रुपये ठगी की शिकायत अपराध शाखा से की थी। पीड़ित ने बताया कि उसने सोशल मीडिया के जरिये दिल्ली की वीजा कंसल्टेंसी कंपनी से संपर्क किया था। उसको पोलैंड और जर्मनी के लिए वर्क परमिट वीजा दिलवाने के नाम पर ठगी की गई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। इंस्पेक्टर विरेंद्र सिंह, एसआई सतवंत सिंह व अन्यों की टीम ने टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपियों की लोकेशन का पता करना शुरू किया।
पटेल नगर इलाके में मेट्रो स्टेशन के पास आरोपियों ने अपनी कंसल्टेंसी खोली हुई थी। 18 मार्च को टीम ने परिसर में छापेमारी की। पुलिस को यहां रोहित और रूसी नागरिक अर्टेम टोल्काचेव के रूप में हुई। इनके पास से लैपटॉप, मोबाइल व अन्य सामान बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान पुलिस टीम को गुमराह करने लगा, लेकिन जल्द ही उसकी हकीकत का पता चला। बाद में टीम डीएलएफ मोती नगर में छापेमारी कर वहां से इगोर सिरेंको को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए। बाद में दूसरे भारतीय सागर शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

ऑटो चालक के नाम से खोल रखी थी फर्म...

अक्तूबर 2022 में इगोर सिरेंको सज्जन के ऑटो में यात्रा करता था। इस बीच उसने ऑटो चालक को जॉब का ऑफर रखा। उसने सज्जन सिंह और अर्टेम का संयुक्त बैंक खाता खुलवाया। सज्जन को फर्म का 15 फीसदी का निदेशक नियुक्त कर दिया। अर्टेम टोल्कोचेव ने खुद को फर्म का मैनेजिंग डायरेक्टर बना लिया। इस तरह इगोर बिना किसी के सामने आए गोरखधंधे में शामिल हो गया। दोनों रूसी नागरिकों ने खुद के रहने के लिए मोती नगर के डीएलएफ में किराए का फ्लैट लिया हुआ था। रूसी नागरिकों ने बताया कि उनका मुखिया नात्स्या रूस में बैठकर पूरे ठगी के धंधे पर वहीं से नजर रखता था। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

रोहित जामिया मिलिया से कर रहा एमबीए...

छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि रोहित ने दिल्ली के दयाल सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद जामिया मिलिया में एमबीए में दाखिला हुआ था। वह पढ़ाई के साथ रूसी नागरिकों द्वारा बताए गए दिशा निर्देशों के अनुसार वीजा के लिए बेरोजगारों से बातचीत करते थे। सागर ने होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा किया हुआ है।
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आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर बनाया हुआ था पेज...

डब्ल्यूजीए वीजा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फर्म बनाने के बाद आरोपियों ने उसके प्रचार के लिए इंस्टाग्राम और फेसबुक पर अपना पेज भी बनवा लिया। इसके अलावा यह गूगल पर विज्ञापन देखकर भी लोगों को अपने जाल में फंसा लेते थे। सागर और रोहित लोगों को यूरोप भेजने के नाम पर 75 हजार से ज्यादा से ज्यादा रकम वसूलते थे।
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