एम्स में 4.47 करोड़ रुपये की लागत से होगी खरीद, बारीक रक्त वाहिकाओं और ऊतकों को देखने में मिलेगी मदद
सिमरन
नई दिल्ली। शरीर का कोई हिस्सा गंभीर रूप से जलने या दुर्घटना में ऊतक क्षतिग्रस्त होने पर उसकी सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। खासकर तब, जब बारीक रक्त वाहिकाओं और ऊतकों को सुरक्षित रखते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करनी हो। ऐसी जटिल सर्जरी को आसान बनाने के लिए एम्स आधुनिक कैमरा सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। करीब 4.47 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे जाने वाले इस 3डी-4के लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरा सिस्टम से ऑपरेशन के दौरान शरीर के अंदरूनी हिस्सों की स्पष्ट और त्रिआयामी तस्वीर देखी जा सकेगी। इससे सर्जनों को बारीक संरचनाओं को पहचानने और अधिक सटीकता से काम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एम्स के प्लास्टिक, रीकंस्ट्रक्टिव और बर्न सर्जरी विभाग के लिए इस सिस्टम की खरीद की तैयारी है। इसमें 4के तकनीक के जरिए अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलेगी, जबकि 3डी दृश्य से अंगों की गहराई और उनके बीच की दूरी समझने में मदद मिलेगी। इससे डॉक्टरों को सर्जरी वाले हिस्से को बेहतर तरीके से देखने और उपकरणों की स्थिति समझने में सहूलियत होगी।
कैमरा संभालने की जरूरत होगी कम
इस सिस्टम की खासियत इसका रोबोटिक कैमरा होल्डिंग आर्म है। इसे जॉयस्टिक की मदद से नियंत्रित किया जा सकेगा। सर्जन जरूरत के अनुसार कैमरे का कोण बदल सकेंगे और उसे स्थिर रख सकेंगे। इससे ऑपरेशन के दौरान कैमरे को हाथ से पकड़कर रखने की जरूरत कम होगी और डॉक्टर अपने दोनों हाथों से सर्जरी के उपकरणों का इस्तेमाल कर सकेंगे। लंबे और जटिल ऑपरेशन में कैमरे का स्थिर रहना महत्वपूर्ण होता है।
जले हुए मरीजों की सर्जरी में मिलेगी मदद
गंभीर रूप से जले मरीजों की सर्जरी में त्वचा, ऊतकों और रक्त वाहिकाओं की मरम्मत करने की जरूरत पड़ती है। कई बार शरीर के क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बनाने के लिए बेहद सावधानी से काम करना होता है। ऐसे में स्पष्ट और त्रिआयामी तस्वीर से डॉक्टरों को महत्वपूर्ण संरचनाओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। सिस्टम में फ्लोरोसेंस गाइडेड सर्जरी की सुविधा भी होगी। इसकी मदद से विशेष तकनीक के जरिए कुछ रक्त वाहिकाओं और ऊतकों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
खरीद प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, प्रस्तावित सिस्टम जर्मनी की कंपनी कार्ल स्टोर्ज का है। इसकी खरीद और स्थापना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसका इस्तेमाल शुरू हो सकेगा। यह तकनीक सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को बेहतर दृश्य उपलब्ध कराने के लिए है। हालांकि, मरीजों को इससे कितना लाभ मिलेगा, यह उनकी बीमारी, चोट की गंभीरता और सर्जरी की प्रकृति पर निर्भर करेगा।