कम खर्च करके अधिक कमाई के चक्कर में ग्रामीण क्षेत्र के कुछ युवाओं में पुरखों से विरासत में मिली मोटी रकम अमीर बनने के लालच में गवां दी। एक-एक युवक ने 5 से 15 लाख रुपये तक अलग-अलग आईडी से लगा दिए हैं और अब फर्जीवाडे़ का खुलासा हुआ तो मुआवजे में मिले रुपये डूब गए।
किसी ने पिता की रिटायरमेंट की रकम लगाई तो किसी ने परिजनों को बिजनेस बताकर पैसे डुबा दिए। हर गांव में ऐसे दो-चार युवक मिल रहे हैं और अब वह परेशान हैं कि आखिर अपने रुपयों को वापस कैसे लाएं।
दरअसल, एबलेज इंफो कंपनी ने 57,500 रुपये में एक व्यक्ति को सदस्य बनाया था। इसके बाद उस सदस्य को चेन बनाते हुए दो लोगों को अपने साथ जोड़ना था और जो दो जोड़े गए थे उनको भी दो-दो अपने साथ जोड़ने थे। इस तरह चेन बढ़ते-बढ़ते काफी लंबी हो गई।
शुरूआत में यह धंधा केवल शहर में ही चल रहा था, लेकिन जैसे ही एनसीआर समेत अन्य गांवों में यह सिलसिला शुरू हुआ तो इसके सदस्यों की संख्या तेजी बढ़ने लगी। नोएडा-ग्रेटर नोएडा के गांवों में कुछ युवाओं ने पैतृक जमीन के बदले में मिले मुआवजे को भी लगा दिया। ग्रेनो के एक गांव के निवासी दिलेर सिंह ने बताया कि उनके पिता को करीब चार साल पहले मुआवजा मिला था।
15 लाख रुपये उसने इसमें लगा दिए। परिवार के सभी सदस्यों और ससुराल व मामा-मामी तक को उसने अपने ही रुपयों से सदस्य बना दिया। करीब चार माह में 15 लाख रुपये खर्च करके उसे एक से डेढ़ लाख रुपये ही मिले थे। बाकी रकम फंस गई। नोएडा के एक गांव निवासी सतीश कुमार का कहना है कि उनके पिता को हाल ही में मुआवजा मिला था। वह पांच भाई हैं।