गुड़गांव के द्रोणाचार्य कॉलेज में छात्रों को नकल कराने के लिए एक पूरा गिरोह सक्रिय है। गिरोह से जुड़े युवक प्रश्न का उत्तर पहुंचाने के लिए कॉलेज कैंपस में एक ‘चक्रव्यूह’ रचते हैं। एवज में छात्रों से 300 रुपये लेते हैं। इनके सामने कॉलेज प्रशासन का इंतजाम बौना साबित हो रहा है। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) ने छात्रों द्वारा नकल रोकने के लिए फ्लाइंग दस्ते का इंतजाम किया है, लेकिन परीक्षा शुरू होने से अब तक कोई भी दस्ता नहीं पहुंचा है, जिसका फायदा नकल कराने वाला गिरोह उठा रहा है। शिक्षकों की कमी की वजह से लगे अस्थाई परीक्षा निरीक्षक संदेह के घेरे में हैं। छात्रों को नकल कराने के लिए सबसे आसान सहयोगी खिड़की के पास बैठे छात्र हैं।
ये है पूरा ‘चक्रव्यूह’
परीक्षा शुरू होने से पहले ही छात्र और नकल कराने वाले युवक आपस में सौदा तय कर लेते हैं। संभावित प्रशभनों की पूरी सूची तैयार रहती है। परीक्षा से पहले जारी सीटिंग प्लान के जरिए छात्र तक पहुंचने का जरिया ढूंढ लेते हैं। परीक्षा शुरू होने के साथ ही पूरे युवाओं की टीम तीन ग्रुप में बंटकर काम करते हैं। एक टीम मुख्य द्वार के बाहर खड़ी रहती है, जो पुलिस और फ्लाइंग दस्ते की गतिविधियों पर नजर रखती है। एक टीम टैगोर ऑडिटोरियम के पीछे दीवार के बाहर खड़ी रहती है। एक टीम कॉलेज परिसर में सक्रिय रहती है। दीवार के पीछे और कैंपस में खड़ी टीमें छात्रों तक पर्ची पहुंचाने का काम करती हैं। टीम के एक सदस्य बताते हैं कि जिन छात्रों से पैसा लिया जाता है, उनपर खास ध्यान दिया जाता है।
कुछ इस तरह चलता है खेल
जिन छात्रों से पैसा लिया जाता है, उनका क्लास, सेमेस्टर और सीटिंग रूम की जानकारी टीम के सभी सदस्यों के पास होती है। टीम के एक लड़के ने बताया कि प्रशभन पत्र मिलने और उपस्थिति पत्र पर हस्ताक्षर के बीच यह पता चल जाता है कि कौन-कौन से लंबे उत्तर बताने हैं। अधिकतम तीन प्रशभन का नकल पर्ची उपलब्ध कराते हैं। एक कमरे में दो से पांच लोग फोकस करते हैं। टैगोर ऑडिटोरियम में सात लोग तो न्यू टीचिंग ब्लॉक में चार से पांच लोग है। इसी तरह अन्य ब्लॉक के लिए बंटा हुआ है। बता दें कि अमूमन कक्षाओं में चार यूनिट में आठ लंबे प्रशभन होते हैं। हर एक यूनिट से एक-एक प्रश्न होते हैं। एक प्रश्न के 16 अंक होते हैं।
लड़के ने आगे बताया कि प्रशभन की जानकारी मिलने के बाद इसकी सूचना तत्काल दीवार के बाहर खड़ी टीम को दी जाती है, जो गाइड और संभावित प्रशभनों का उत्तर लेकर खड़ा रहता है। संभावित सूची से बाहर के प्रशभन आने पर गाइड से ढूंढ़कर माइक्रो जेरॉक्स कराई जाती है। दीवार के पास खड़ी टीम कैंपस के अंदर उपलब्ध कराती है। फिर वो क्लास में आकर पर्ची उपलब्ध कराता है या फिर पानी या बाथरूम के बहाने आए छात्र को उत्तर दे देता है। किस तरह वो क्लास रूम में लिखता है, वो उसकी जिम्मेवारी होती है।