शहरों में जैसे-जैसे गाड़ियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, वैसे ही पार्किंग की समस्या भी गहराती जा रही है, लेकिन अब इसके समाधान के लिए कंप्यूटर साइंस के तीन विद्यार्थियों ने मोबाइल एप्लीकेशन तैयार की है।
‘ऑटोमेटेड पार्किंग सिस्टम’ नाम की इस एप्लीकेशन से पार्किंग स्पेस की ऑनलाइन बुकिंग करवा सकेंगे। एप्लीकेशन बनाने वाले अमित, ईशान व निखिल के मुताबिक, भविष्य में ऐसी नौबत आने वाली है, जब गाड़ियां अधिक होंगी और किसी मॉल व बाजार में जाने से पहले पार्किंग स्पेस बुक करवाना होगा।
मानव रचना यूनिवर्सिटी के हैं ये तीनों छात्र
ये छात्र मानव रचना यूनिवर्सिटी के हैं। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. एसएस त्यागी ने इनके ग्रुप लीडर की भूमिका निभाई। डॉ. त्यागी के मुताबिक, घर से चलने से पहले यह पता लग जाएगा कि किसी पार्किंग विशेष में कितनी जगह है।
भविष्य में हर पार्किंग के बाहर एक डिस्पले बोर्ड होगा, जिसमें लिखा होगा कि उसमें कितनी कारें और बाइक पार्क हैं। कितनी जगह शेष है। त्यागी के मुताबिक, कभी कभार मल्टीलेवल पार्किंग में यह पता नहीं चलता कि हमने गाड़ी कहां खड़ी की है।
इस समस्या का भी निदान होगा। पर्ची लेने की जगह आपको मोबाइल नंबर देना होगा। पार्किंग में घुसते ही मोबाइल पर मैसेज आएगा कि आपकी गाड़ी किस जगह खड़ी है।
इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट आमंत्रित किए
लगभग एक साल की मेहनत के बाद इसका मॉडल सफल रहा है। फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसका प्रजेंटेशन देखा है। इस मॉडल को जल्द ही व्यवहारिक प्रयोग के तौर पर यूनिवर्सिटी में ही लागू किया जाएगा।
डॉ. त्यागी के मुताबिक इसका पेटेंट भी करवाया जाएगा। कॉलेज में सीखी बातों का उद्योगों में प्रयोग करने को लेकर एफआईए (फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) का एक कार्यक्रम शुरू हुआ है।
एफआईए ने फरीदाबाद, गुड़गांव के आठ इंजीनियरिंग कॉलेजों से ऐसे इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट आमंत्रित किए थे, जिन पर आगे काम करने की गुंजाइश है। इसमें मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं आईटी ट्रेड से 20 प्रोजेक्ट आए।
दिखने में आए और भी कई बेहतरीन प्रोजेक्ट
-लिंग्याज यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने एक हाइब्रिड बाइक तैयार की है, जोकि ऑक्सीजन, हाइड्रोजन मिक्स करके कुछ दूर तक चल रही है। इस पर आगे काम हो सकता है।
-एपीजे इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक ऐसी बेल्ट तैयार की है, जिसके जरिये कुर्सी पर बैठने का सलीका पता चलेगा। यदि आप गलत तरीके से बैठेंगे तो आपका मोबाइल सही तरीका बताएगा।