27वें विश्व पुस्तक मेले के आखिरी दिन भी पुस्तक प्रेमी भारी संख्या में प्रगति मैदान पहुंचे। आलम यह था कि वे बोझ से थक गए, लेकिन किताबें खरीदने का जज्बा कम नहीं हुआ। इस बीच, भारत और विदेशी भाषाओं की किताबों ने पाठकों के दिलों पर छाप छोड़ी। प्रगति मैदान के छोटे से हिस्से में आयोजित पुस्तक मेले में उमड़ी पाठकों की भारी भीड़ ने इसे यादगार बना दिया।
रविवार को पाठकों की भीड़ शनिवार के मुकाबले कम रही, लेकिन उनमें पुस्तकें खरीदने का जबरदस्त उत्साह दिखा। डीयू की छात्रा वैशाली दिवाकर ने बताया कि उन्हें पसंद की काफी सारी पुस्तकें मिल गईं। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें खरीद भी लीं, लेकिन मन नहीं भरा। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के बोझ से उनके कंधे थकने लगे, लेकिन पसंदीदा पुस्तकों की तलाश बंद नहीं की। 62 वर्षीय सरोज देवी ने बताया कि उन्हें पुस्तक पढ़ना बेहद पसंद है। मेले का आखिरी दिन होने के कारण वह परिवार के साथ पुस्तकें खरीदने पहुंचीं। उन्होंने करीब तीन घंटे तक अपनी पसंदीदा पुस्तकें छांटीं। उन्होंने खास तौर पर हिंदी और अंग्रेजी के उपन्यास खरीदे।
पुस्तकें खरीदकर लौटते पाठकों की भीड़ से प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन खचाखच भर गया। इस बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने स्टेशन के बाहर भी लोगों की लाइनें लगवाईं। लोगों को मेट्रो स्टेशन में दाखिल होने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर करीब 3 बजे से लेकर देर शाम तक प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन पर लोगों की भारी भीड़ रही। दिल्ली निवासी संतोष कुमार ने बताया कि मेट्रो स्टेशन पर भारी भीड़ के कारण वह पैदल ही आईटीओ पहुंचे और उसके बाद मेट्रो में सवार हुए।
मेले के आखिरी दिन राजकमल प्रकाशन पर राग दरबारी, मैला आँचल, तमस, जूठन, चित्रलेखा, काशी का अस्सी आदि पुस्तकों की मांग रही। नई पुस्तकों में तसलीमा नसरीन के उपन्यास बेशरम, अरुंधति रॉय के उपन्यास अपार खुशी का घराना, सहेला रे, जल थल मल, जनता स्टोर, ग्यारहवी के लड़के, पाजी नज्में और मंटो आदि पुस्तकों का बोलबाला रहा। 14 वर्षीय लेखिका कृष्णा सोबती का उपन्यास भी काफी पसंद किया गया। लेखक से मिलिये सत्र में पाठक अरुंधती रॉय, तसलीमा नसरीन, अनुराधा बेनीवाल, अल्पना मिश्र, शाजी जमां, नवीन चौधरी, हिमांशु बाजपेयी और गीतांजलिश्री से रू-ब-रू हुए।
प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर बॉयोग्राफी बुक्स पर विशेष छूट दी गई। पाठकों ने स्वामी विवेकानंद, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर लिखी पुस्तकें खरीदीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मोदित्व, नमो सरकार, नमोवाणी, इन इरा ऑफ मोदी और डाइनेमिक डिप्लोमेसी एंड फॉरेन पॉलिसी की खूब धूम रही। यश पब्लिकेशन के स्टाल पर संजय द्विवेदी की पुस्तक मोदी युग का लोकार्पण किया गया। इस पर 30 प्रतिशत की छूट दी गई। बस्तर, छत्तीसगढ़ और नक्सलवाद पर लिखी राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तकें चर्चा में रहीं।
लेखक मंच पर ‘हिमाचल भाषा अकादमी, शिमला‘ ने समकालीन साहित्य के विविध आयाम विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया। केंद्रीय विश्वविद्यालय कांगड़ा के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री मुख्य अतिथि थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. पूरनचंद टंडन की अध्यक्षता में डॉ. कर्म सिंह, डॉ. इंद्र सिंह, डॉ. हेमराज कौशिक, रूपेश्वरी शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, पोमिला ठाकुर आदि ने समकालीन साहित्य के विभिन्न आयाम पर चर्चा की। संचालन डॉ. ओम प्रकाश शर्मा ने किया।
अरब दूतावास ने की सराहना
नई दिल्ली। सऊदी अरब दूतावास ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के विश्व पुस्तक मेले की सराहना की है। सऊदी के सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. अब्दुल्लाह सलेह अल-शेत्वी ने अमर उजाला को बताया कि उनका देश 12 साल से विश्व पुस्तक मेले में भागीदारी कर रहा है। इस बार भी वह अरबी और उर्दू की बहुत सी पुस्तकें लेकर पहुंचे थे। पुस्तक मेले से भारत और अरब के पुराने रिश्तों को और मजबूती मिलती है। उनके स्टॉल पर 100 से ज्यादा भाषाओं में कुरआन का अनुवाद पाठकों के लिए उपलब्ध था। इन भाषाओं के उर्दू, हिंदी, स्पेनिश, टर्किश, इंग्लिश और फ्रेंच आदि शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि दोनों संस्कृतियों को एक साथ बढ़ावा देने के लिए भारत में एजुकेशनल प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है।