दिल्ली के बजट में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की कोशिश दिख रही है। बजट में छात्रों से लेकर शिक्षकों तक को तरजीह दी गई है। खासकर नए स्कूल बनाने और शिक्षकों व युवाओं के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है।
बजट में शिक्षा के लिए 2482 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जबकि वर्ष 2013 में यह बजट 2076 करोड़ रुपये था। सरकारी स्कूलों में हर साल बढ़ रही नामांकन की दर को देखते हुए 500 स्कूल खोले जाने की जरूरत है।
'विरोध करने वाली भाजपा ने क्यों दी सब्सिडी?'
इस चुनौती का सामना करने के लिए चालू वित्त वर्ष में पहले चरण में 20 नए स्कूलों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 350 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने का प्रस्ताव है। दो विधानसभा में लड़कियों के लिए सीनियर सेकेंडरी स्कूल खोले जाएंगे। बाकी 68 विधानसभाओं में 380 स्कूल लड़कियों केलिए पहले से हैं।
शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए सरकार पाठ्यक्रम की विषयवस्तु और अध्यापन कौशल पर ध्यान देगी। इसके लिए एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) के माध्यम से 20,318 अध्यापकों को प्रशिक्षण देने का प्रावधान है।
फुहारों से मिला सुकून बजट में मिली राहत
सरकारी स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में उर्दू, पंजाबी और संस्कृत पढ़ाई जा रही है। इन भाषाओं को प्रमोट करने के लिए अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा सभी स्कूलों में स्वच्छ शौचालयों का निर्माण और मरम्मत करने के आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
बजट में उच्च शिक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। पीपीपी के तहत एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र उद्योग जगत की जरूरतों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिवर्ष लगभग 15,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करेगा।
दिल्ली बजट पर केजरीवाल के 5 सवाल
इसके साथ ही आईपीयू की तरफ से पूर्वी दिल्ली में 285 करोड़ रुपये की लागत से नया नियोजन, वास्तुकला और डिजाइन स्कूल बनाया जाएगा। द्वारका स्थित एनआईटी की तर्ज पर नरेला में 158 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) बनाया जाएगा।
वहीं द्वारका में 151 करोड़ रुपये की लागत से दीन दयाल उपाध्याय महाविद्यालय और रोहिणी में 132 करोड़ की लागत से शहीद सुखदेव व्यवसाय अध्ययन महाविद्यालय के नए भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है।