नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गुरुग्राम के चोमा गांव में 20 पेड़ों की जगह बदली के नाम पर 1322 बड़े और 921 छोटे पेड़ों के अवैध कटान के मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक को दो माह के भीतर कार्रवाई करने और पेड़ों के नुकसान की भरपाई का आकलन कर जुर्माना वसूलने का आदेश दिया है।
पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पर्यावरण संरक्षण के काम में लगे सभी प्राधिकरणों का यह दायित्व है कि वे न सिर्फ पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें, बल्कि लोगों के विश्वास को भी कायम रखें।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची नरेश यादव के मामले में यह आदेश दिया है। याची का आरोप है कि एमथ्रीएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एमथ्रीएम इंडिया होल्डिंग्स लिमिटेड के जरिये अवैध रूप से पेड़ काटे गए हैं।
पीठ ने कहा कि 20 फरवरी को दाखिल जांच रिपोर्ट से साफ है कि 1322 बड़े और 921 छोटे पेड़ काटे गए। मंजूरी सिर्फ 20 पेड़ों की जगह बदली को ही मिली थी। इस मामले में 26 मार्च, 2017 को एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। इसमें एक वन अधिकारी के जरिये ही घूस लेने का मामला भी शामिल है। वहीं, याची की मांग है कि सिर्फ एफआईआर से न्याय पूरा नहीं होगा। ऐसे में जरूरी है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक पर्यावरणीय क्षति का आकलन करें और आरोपियों से जुर्माना वसूलें।
पीठ ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण क्षति का आकलन अभी की कुल कीमत और वन विभाग में पेड़ों की लिखित कीमत के आधार पर तय होनी चाहिए। पीठ ने याचिका का निस्तारण करने के साथ ही कहा कि कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल होने के बाद मामले पर जुलाई में सुनवाई होगी।