दक्षिण एशिया का क्लब में जल, लैंगिक समानता एवं जलवायु पर सेमिनार
देश में जल उपलब्धता घटकर हुई 1,486 घन मीटर
नई दिल्ली। विश्व जल दिवस पर जल, लैंगिक समानता एवं जलवायु विषय पर दक्षिण एशिया का क्लब में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जहां जल बहता है, वहां समानता बढ़ती है टैगलाइन के साथ हुए कार्यक्रम में देश-विदेश के नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, राजनयिकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राज भूषण चौधरी और मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. वीके सरस्वत उपस्थित रहे। अन्य प्रमुख वक्ताओं में डॉ. जी सतीश रेड्डी, हर्षवर्धन श्रृंगला, राजेंद्र सिंह, केआर सुरेश रेड्डी और संतोष कुमार शामिल रहे।
सेमिनार में जल संकट की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया गया कि देश में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता घटकर 1,486 घन मीटर रह गई है, जबकि 60 करोड़ लोग जल संकट से जूझ रहे हैं। बताया गया कि 2030 तक 21 प्रमुख शहरों में भूजल समाप्त होने का खतरा है।
पारंपरिक जल संरचनाओं के पुनरुद्धार पर जोर
सेमिनार में बताया गया कि वैश्विक स्तर पर 1.8 अरब लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं है। महिलाएं प्रतिदिन करोड़ों घंटे पानी लाने में खर्च करती हैं। इस अवसर पर पारंपरिक जल संरचनाओं के पुनरुद्धार और समुदाय-आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। साथ ही 2031 तक सिंचाई दक्षता 60 फीसदी तक बढ़ाने और जल सुरक्षा को जलवायु प्रतिबद्धताओं से जोड़ने की सिफारिश की गई। संवाद