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2012 मारुति प्लांट हिंसा मामले में 13 दोषियों को उम्रकैद की सजा, 14 रिहा

Sat, 18 Mar 2017 05:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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maruti
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2012 मारुति सु‌जुकी की गुड़गांव स्थित मानेसर प्लांट में हुई हिंसा मामले में कोर्ट ने आज फैसला सुना दिया। कोर्ट ने 31 दोषियों में से 13 को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने बाकी 14 दोषियों का जेल में बिताया गया समय उनकी सजा के रूप में मानते हुए उन्हें रिहा कर दिया है।
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देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मानेसर प्लांट में 18 जुलाई 2012 को हुई हिंसा मामले में दोषी ठहराए गए 31 आरोपियों की सजा पर शुक्रवार को अदालत में बहस हुई थी।

इसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरपी गोयल की अदालत ने सजा पर फैसला शनिवार शाम 4:00 बजे सुनाने का निर्णय लिया था।

इससे पहले अदालत ने 10 मार्च को मामले में 148 में से 31 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि 117 को बरी कर दिया था। दोषियों की सजा पर फैसला शुक्रवार को होना था। इसलिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर रखी थी। सुबह करीब 12 बजे कोर्ट नंबर-5 में मारुति प्रकरण पर बहस शुरू हुई।
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वकीलों ने की थी 13 श्रम‌िकों पर धारा 302 व 307 के तहत बहस

maruti - फोटो : REUTERS
अभियोजन पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील पाहवा तथा गुरुग्राम न्यायालय के सरकारी वकील अनुराग हुड्डा ने 13 श्रमिकों पर 302, 307 आदि धाराओं पर बहस की।

साथ ही 18 श्रमिकों पर 325, 452 आदि धाराओं के तहत बहस हुई। इसमें उन्होंने धारा 302 के तहत दोषी 13 लोगों को फांसी की सजा और दोषी 18 आरोपियों को अधिकतम सात साल की सजा की मांग अदालत से की।

बचाव पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की वकील रेबेका जोन, वृंदा ग्रोवर तथा राजकुमार ने बहस की। उन्होंने अदालत के सामने दोषी करार दिए गए श्रमिकों की पारिवारिक व आर्थिक स्थिति के अलावा उनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने की दलील रखी।

उन्होंने अदालत को बताया कि 18 श्रमिक पहले ही जेल में 4 से 5 साल की सजा भुगत चुके हैं। इसलिए इनकी सजा और न बढ़ाई जाए। अदालत ने दोपहर 3:00 बजे तक दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला शनिवार शाम 4:00 बजे तक सुरक्षित रख लिया।
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यह था पूरा मामला

maruti
18 जुलाई 2012 को कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान मारुति सुजुकी के जनरल मैनेजर (एचआर) अवनीश देव की मौत हो गई थी। आरोप है कि उन्हें जिंदा जलाकर मारा गया। हिंसा में करीब 100 लोग घायल भी हुए थे।

दरअसल कंपनी ने कम वेतन वाले कुछ अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती कर ली थी, जिसके विरोध में कंपनी के कर्मचारी हड़ताल करने लगे थे। 18 जुलाई को यह हड़ताल हिंसा में बदल गई।

अवनीश देव की उस समय मौत हो गई, जब प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कथित तौर पर प्लांट में आग लगा दी। इस मामले में 148 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 117 को बरी कर दिया गया था, जबकि 31 को दोषी करार दिया गया था। 
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