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पंजाब-गोवा में करारी हार के बाद केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं को लिखा भावुक लेटर

Sat, 18 Mar 2017 05:03 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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kejriwal letter - फोटो : सोशल मीड‌िया
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पंजाब और गोवा विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की करारी हार के बाद कार्यकर्ताओं का गिरा मनोबल बढ़ाने के लिए केजरीवाल ने उनके नाम एक पत्र लिखा है। इसमें केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि विश्वास बनाए रखें हम होंगे कामयाब।
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2014 के लोकसभा चुनाव में पंजाब से 4 सांसद भेजने वाली पार्टी को पंजाब जीतने का बहुत भरोसा था जो चुनाव नतीजे आने के बाद टूट गया। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में 20 ‌सीटें जीतीं जबकि गोव में वह अपना खाता भी नहीं खोल सकी।

गौरतलब है कि दिल्ली में 22 अप्रैल को एमसीडी के चुनाव होने हैं ऐसे में केजरीवाल का कार्यकर्ताओं को लिखा यह लेटर पूरी तरह से उनका मनोबल बढ़ाने के लिए लिखा गया लेटर माना जा रहा है। आगे की की स्लाइड में पढ़िए पत्र में लिखी दस बड़ी बातें।
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पढ़ें क्या-क्या ल‌िखा

kejriwal letter - फोटो : सोशल मीड‌िया
1- जब से पंजाब और गोवा चुनाव के नतीजे आए हैं, समर्थकों का लगातार फोन आ रहा है और वो पूछ रहे हैं कि अब हमारा और पार्टी का आगे क्या होगा। यह समझने के लिए कि अब क्या होगा, हमें वो समय याद करना होगा जहां से हमने शुरुआत की थी और अब हम कहां पहुंचे हैं।

2- 6 साल पहले जब हमारे आंदोलन की शुरुआत हुई थी तब से लेकर आज तक हमने लंबा सफर साथ में तय किया है। आप लाखों लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरते रहे हैं।

3- हम सब बस यही चाहते थे कि एक भ्रष्टाचार मुक्त देश बने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कानून बनें। अन्य पार्टियों ने हमारा मजाक बनाया और कहा कि चुनाव लड़ो और जनलोकपाल बिल पास कराओ।

4- हजारों लोगों ने अपना तन-मन-धन लगा दिया और 2013 में हम 70 में से 28 सीट और 2015 में हम 70 में 67 सीटें दिल्ली में लाए।

5- हालांकि हमें पंजाब में मनचाहा रिजल्ट नहीं मिला लेकिन हम प्रमुख विपक्षी पार्टी बन गए हैं। यहां तक कि गोवा में भी हमें 6 प्रतिशत मतदान मिला। हम राष्ट्रीय पार्टी बनने से मात्र एक राज्य दूर हैं।
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हमारे पास भी कोई कारण नहीं जो हम हार मान जाएं

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6- हमें यह समझने के लिए पूरा वक्त लगेगा कि हम क्यों और कैसे हार गए। यह सोचने से पहले कि आगे क्या होगा हमें यह समझना हो कि हारना और जीतना तो राजनीति का हिस्सा है।

7- 65 साल पुरानी भाजपा को कर्नाटक में सिर्फ 18 प्रतिशत सीट और बीस पर्सेंट वोटशेयर मिला था। 130 साल पुरानी कांग्रेस को महाराष्ट्र में सिर्फ 15 प्रतिशत सीटें और 18 प्रतिशत वोट शेयर हासिल हुए थे। उन्होंने हार नहीं मानी और हमारे पास भी कोई कारण नहीं जो हम हार मान जाएं।

8- जो प्रश्न हमें अपने आप से पूछना चाहिए वो ये है कि क्या वर्तमान में चल रही राजनीतिक व्यवस्था सही है? क्या भ्रष्टाचार और पूंजीवाद खत्म हो गया है?

9- क्या न्याय सबके लिए समान है? क्या आम आदमी को वो मिल रहा है जिसका वो हकदार है? अगर इसका उत्तर 'ना' में है तो हमें काम करना जारी रखना होगा और अपनी राजनीतिक रिजॉल्यूशन को मजबूती देना होगा।

10- आपने हम पर तब भरोसा किया था जब हमने अपना पहला ‌कदम उठाया था, चुनाव लड़ने का तब हमारे पास कोई अनुभव भी नहीं था और हमें ये भी नहीं पता था कि हम एक भी सीट जीत पाएंगे या नहीं। भरोसा रखिए, लड़ाई जारी रखिए, हम होंगे कामयाब।
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