तब्लीगी जमात मामले में 200 इंडोनेशियाई नागरिकों को निजी मुचलके पर अदालत ने बुधवार को जमानत दे दी। इन विदेशी जमातियों पर कोविड-19 महामारी अधिनियम, वीजा नियम और सरकारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है।
इन्हें निजामुद्दीन मरकज से मार्च में अवैध रूप से आयोजित तब्लीगी जमात में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। साकेत कोर्ट की सीएमएम गुरमोहिना कौर ने इन विदेशी नागरिकों को 10-10 हजार रुपये निजी मुचलके पर जमानत प्रदान की।
इन आरोपियों को इनके देश के उच्चायोग और मामले के आईओ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया। इन विदेशी नागरिकों की पैरवी वकील आशिमा मंडला, मंदाकिनी सिंह और फहीम खान ने की।
ये सभी विदेशी नागरिक गुरुवार को समझौता याचिका दायर कर सजा कम करने का आग्रह अदालत से करेंगे। इन आरोपियों के अपराध स्वीकार करने पर अदालत ने इन्हें जुर्माना लगाकर छोड़ सकती है। यह याचिका उन मामलों में दायर की जाती है जिनमें सात साल तक सजा का प्रावधान है।
उल्लेखनीय है कि इन आरोपियों को निजामुद्दीन मरकज से पुलिस ने मार्च में हिरासत में लेकर कोविड-19 क्वारंटीन सेंटरों में रखा था, लेकिन इनकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद इन्हें अदालत ने अन्य स्थानों पर ठहरने की अनुमति दे दी।
इन विदेशी नागरिकों पर पुलिस की निगरानी रही, लेकिन इन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस ने तब्लीगी जमात से पकड़े गए 900 से ज्यादा जमातियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए थे।