ग्रेटर नोएडा के आबादी न तोड़ने के एवज में 20 लाख रुपये मांगने का आरोप लगाने के मामले में कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। सूरजपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कालूराम चौधरी ने धारा 156/3 के तहत प्राधिकरण के एसीईओ मानवेंद्र सिंह, डीजीएम प्रोजेक्ट राजीव त्यागी और सीनियर मैनेजर डोरी लाल वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था।
इसमें उन्होंने कहा गया है कि उनके ग्राम भनौता में संबंधित भूमि एसडीएम के आदेशानुसार आबादी घोषित की हुई है। 13 नवंबर 2014 को कालूराम चौधरी जब वहां बैठे थे तो प्राधिकरण के अधिकारी पहुंचे और आबादी को तोड़ने की धमकी दी। आरोप है कि उन्होंने आबादी न तोड़ने के लिए 20 लाख रुपये की मांग की। इस संबंध में 15 नवंबर को एसएसपी से शिकायत की गई।
न्यायालय ने सूरजपुर पुलिस से आख्या तलब की। थाने से मिली आख्या में उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम 1976 की धारा-10 के तहत अवैध निर्माण हटाने के लिए 12 जून 2014 को नोटिस दिया गया था, परंतु याची ने अवैध निर्माण नहीं हटाया।
थाने की आख्या के अनुसार कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीणा चौधरी ने सुनवाई के दौरान उल्लेखनीय तत्थों को प्राधिकरण के इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने के लिए पर्याप्त आधार माना। सूरजपुर कोतवाली को मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा गया है। साथ ही पुलिस को मुकदमा दर्जकर कोर्ट में पेश करने के निर्देश भी दिए गए हैं।