भूकंप जैसी आपदा में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) 20 मीटर नीचे तक मलबे में दबे लोगों को मिनटों में तलाश लेगी।
एनडीआरएफ के पास जल्द ही ग्राउंड सेंसर रडार और स्नैक कैमरा होगा। इन उपकरणों की खरीद के लिए गृह मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है।
नेपाल त्रासदी में 31 देशों की 71 टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी थीं। इसमें इंडिया की एनडीआरएफ ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया था।
एनडीआरएफ कमांडेंट पीके श्रीवास्तव ने बताया कि नेपाल से वापस आने पर गृह मंत्रालय ने ऐसे उपकरणों की लिस्ट मांगी थी, जिनकी नेपाल त्रासदी में रेस्क्यू के दौरान कमी रही थी। इस पर ग्राउंड सेंसर रडार और स्नैक कैमरा समेत कई उपकरणों के आधुनिकीकरण का प्रपोजल बनाकर भेज था।
क्या है ग्राउंड सेंसर रडार
यह एक अल्ट्रा साउंड की तरह काम करने वाली मशीन है। मलबे के ऊपर इस मशीन को लगाया जाएगा। इसमें से निकलने वाली साउंड बेव्स किरणें 20 मीटर नीचे तक जाकर वापस आएंगी।
इसके बीच यदि कोई व्यक्ति दबा है तो मशीन की स्क्रीन पर दिख जाएगा। इससे सही जगह का मलबा हटाकर लोगों को निकाला जा सकेगा।
क्या है स्नैक कैमरा:
स्नैक कैमरा एक सांप की तरह लचीला तार है। इसके सामने कैमरा लगा होगा। यह तार मलबे में खाली जगह में आसानी से मुड़ जाएगा। अंधेरे में भी इसमें लगा कैमरा बाहर की स्क्रीन पर मलबे में दबे लोगों की फोटो देगा।
अभी एनडीआरएफ विक्टिम लोकेटिंग कैमरे से लोगों की तलाश करती है। जिसके लिए पहले मलबे में होल करना पड़ता है। होल में कैमरे को डालकर 180 डिग्री पर लोगों की तलाश की जाती है।