बिजली मीटर अपडेट करने के लिए 13 रुपये की पेमेंट करने को कहा, निकाल लिए 20 लाख
- बिजली मीटर अपडेट कराने के नाम पर ठगी करने वाला एक गिरफ्तार
ध्यानार्थ- फिरोजाबाद, व गाजीपुर यूपी के लिए उपयोगी।
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
शाहदरा जिले की साइबर थाना पुलिस ने बिजली मीटर अपडेट कराने के नाम पर 20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाले एक आरोपी धनंजय गोंड को गाजीपुर, यूपी से गिरफ्तार किया है। वह ठगी के एक मामले का मुख्य आरोपी है। शाहदरा जिला पुलिस उपायुक्त राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि यह मामला 8 मार्च, 2026 को उस समय सामने आया था जब शिकायतकर्ता मानसरोवर पार्क, शाहदरा, दिल्ली निवासी विनोद शर्मा रिपोर्ट की कि बीएसईएस के अधिकासी बनकर जालसाजों उसके साथ धोखाधड़ी की है। पीड़ित को शुरू में उनके बिजली मीटर को अपडेट करने के बहाने फोन पे के माध्यम से 13 रुपये का मामूली भुगतान करने के लिए कहा था। इसके बाद उनके मोबाइल डिवाइस से छेड़छाड़ की गई, जिसके परिणामस्वरूप कई अनाधिकृत और बड़ी रकम के लेन-देन हुए। इसके बाद साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्जकर जांच शुरू की। इस मामले में दो आरोपी कबीरपुर, फिरोजाबाद, यूपी निवासी शिव कुमार और धोंकेली, फिरोजाबाद यूपी निवासी अंशु कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने बताया था कि धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को पैसे के लेन-देन का सुराग मिटाने के लिए सीएससी आईडी के माध्यम से भेजा गया था। इनके खुलासे के बाद एसआई अनुज तोमर की टीम ने जिला गाजीपुर, यूपी में तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद पुलिस टीम ने ग्राम चूड़ामनपुर, अभिसाहन, जिला गाजीपुर यूपी आरोपी धन्नंजय गोंड (30) को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से एक मोबाइल फ़ोन मिला है। इस मोबाइल नंबर को इस्तेमाल पहले गिरफ्तार दोनों आरोपियों से बातचीत करने के लिए किया जाता था।
पूछताछ के दौरान धनंजय ने बताया कि उसने सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) आईडी और पासवर्ड का इंतज़ाम करके साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। उसने ये क्रेडेंशियल आरोपी अंशु कुमार से हासिल किए और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे फेसबुक के ज़रिए अपने एक और साथी महेश बाबू को भेज दिया। उसने कमीशन के बदले अवैध लेन-देन के लिए कम से कम चार सीएससी आइडी शेयर करने की बात कबूल की, जिसका कुछ हिस्सा उसने सह-आरोपी अंशु कुमार के साथ भी शेयर किया।
मोबाइल डेटा से ये पता लगा-
मोबाइल डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि धनंजय गोंड, अंशु कुमार और अन्य साथियों के बीच लगातार बातचीत होती थी। आरोपियों के बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुए हैं। ठगी गई रकम को घुमाने और छिपाने के लिए सीएससी आईडी का इस्तेमाल किया गया। इन नतीजों से इस गिरोह के भीतर एक साफ़ साज़िश और पैसे के लेन-देन का एक व्यवस्थित जाल होने की बात साबित होती है।