दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध दिल्ली सरकार के बीस से अधिक कॉलेज बिना प्रिंसिपल के चल रहे हैं। इन कॉलेजों में दस माह से प्रबंध समिति नहीं है। मार्च 2019 के पहले सप्ताह में इन कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इन कॉलेजों में ट्रेंकेटिड (कामचलाऊ) प्रबंध समिति ही कार्य कर रही है। कॉलेजों में प्रबंध समिति के ना होने से प्रिंसिपल पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं।
दिल्ली में आचार संहिता लगने के कारण विधानसभा चुनाव के बाद ही प्रबंध समिति बन पाएगी। दिल्ली सरकार के 20 से अधिक कॉलेजों में 7 मार्च 2019 से गवर्निंग बॉडी नहीं है। सरकार की ओर से प्रबंध समिति सदस्यों के नामों को डीयू को कई बार भेजा गया लेकिन कार्यकारी परिषद ने आज तक उन्हें पास नहीं किया।
डीयू की कार्यकारी परिषद में दो बार प्रबंध समिति का मामला आ चुका है लेकिन सरकार और डीयू प्रशासन के बीच खींचतान के कारण कॉलेजों में प्रबंध समिति नहीं बन पाईं। डीयू एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो हंसराज ने बताया कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में लंबे समय से प्रिंसिपल के पदों को नहीं भरा गया है।
कुछ कॉलेजों में तो पांच साल से भी अधिक समय से ओएसडी के रुप में प्रिंसिपल काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार स्थायी प्रिंसिपल का कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन स्थायी नियुक्ति आज तक नहीं हुई है।