दिल्ली के वसंत विहार गैंगरेप के बाद स्टॉकिंग (पीछा करना) को गैर जमानती अपराध बनाने का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया, जिससे कई पहलू छूट गए। रोहिणी जिला अदालत ने यह टिप्पणी महिला से छेड़छाड़ के मामले का निपटारा करते हुए की।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लॉ ने अशोक सिंह को छेड़छाड़ का दोषी ठहराते हुए उसे दो साल कैद व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि जुर्माने की राशि पीड़ित महिला को मुआवजे के तौर पर दी जाए।
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अभियोजन के मुताबिक पूर्व प्रेमिका की शादी होने के बाद भी अशोक लगातार उसका पीछा कर रहा था। वह उसे लेकर बेहद जुनूनी था। अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि वह दोषी का इहबास से मनोवैज्ञानिक उपचार करवाए।
महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि जब तक दोषी ठीक न हो जाए, उसे समाज से दूर रखा जाए। स्टॉकिंग के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि 16 दिसंबर 2012 के बाद सरकार एकदम हरकत में आई और अध्यादेश पारित कर दिया, जिससे यह अपराध भारतीय दंड संहिता में शामिल हो गया।
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सरकार ने यह कदम लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए उठाया। इस प्रक्रिया में पीछा करने संबंधी कई पहलू छूट गए। इस कमी पर नजर रखने के लिए तंत्र बनाने की आवश्यकता है।