दक्षिण अफ्रीका की सोने और हीरे की खदानों में नौकरी दिलाने का वादा कर दिया था धोखा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाए जाने के आदेश को बरकरार रखा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह मोहम्मद सलीम नामक व्यक्ति द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रहे थे। उसमें कहा गया था कि मजिस्ट्रेट अदालत ने सबूतों की सराहना नहीं की और उसे गलत तरीके से दोषी ठहराया। आदेश में अदालत ने कहा कि तीन शिकायतकर्ताओं, दोस्त मोहम्मद, विजय पाल और उमरुद्दीन ने गवाही दी कि 2002 में अपीलकर्ता सलीम ने उन्हें दक्षिण अफ्रीका की सोने और हीरे की खदानों में नौकरी दिलाने का वादा कर धोखा दिया था। अदालत ने शिकायतकर्ताओं के बयानों का हवाला दिया, जिन्होंने दावा किया था कि सलीम ने यात्रा और नौकरी की व्यवस्था के लिए प्रत्येक से 2.25 लाख रुपये लिए थे, लेकिन जोहान्सबर्ग पहुंचने पर तीनों को पता चला कि उन्हें एक छोटे पर्यटक वीजा पर भेजा गया था।
सलीम पर कोई ठोस बचाव पेश न करने और यह दावा करने का आरोप लगाया गया कि उसने कुछ समझौता राशि का भुगतान किया था। न्यायाधीश सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने सही निष्कर्ष निकाला है कि यह साबित हो गया है कि सलीम का इरादा शुरू से ही बेईमानी का था। उसने शिकायतकर्ताओं को पैसे देने के लिए गलत तरीके से उकसाया था। अदालत ने कहा कि अपील में कोई ठोस आधार नहीं है और जहां तक यह दोषसिद्धि के फैसले को चुनौती देती है, इसे खारिज किया जाता है।