अस्पताल की सीनियर डायरेक्टर एवं रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. विनीता गोयल ने कहा कि आमतौर पर लोग मानते हैं कि सिर और गर्दन का कैंसर केवल तंबाकू या धूम्रपान करने वालों को होता है, जबकि यह पूरी तरह सही नहीं है। तंबाकू और शराब इसके बड़े कारण जरूर हैं, लेकिन खराब मौखिक स्वच्छता, गलत फिटिंग वाले नकली दांत (डेन्चर), एचपीवी संक्रमण, लंबे समय तक धूप में रहना, कमजोर प्रतिरक्षा और असंतुलित खानपान भी इस बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत में हर साल सिर और गर्दन के कैंसर के करीब 2.8 लाख नए मामले सामने आते हैं। यह दुनिया में दर्ज होने वाले ऐसे कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई है। डॉक्टरों का कहना है कि यह कैंसर काफी हद तक रोका जा सकता है और यदि शुरुआती चरण में इसकी पहचान हो जाए तो 80 से 90 प्रतिशत तक मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।