दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग होने के आधार पर आजीवन की सजा को रद्द करने की मांग करने वाले पाकिस्तानी नागरिक खालिद मोहम्मद को राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया। अदालत ने उसकी याचिका को रद्द करते हुए कहा कि दोषी नाबालिग है लेकिन टाडा के आरोप में मिली सजा में उसे राहत नहीं दी जा सकती।
शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय मुंबई 1993 ब्लास्ट मामले में स्पष्ट कर चुका है कि जिस आरोपी को टाडा व पोटा जैसे अपराध में सजा मिली है उसे नाबालिग होने पर भी राहत नहीं मिलेगी।
अदालत ने कहा कि इस मामले में खालिद को आजीवन कारावास की सजा मिली थी ऐसे में वह नाबालिग होने के बावजूद सजा में कटौती का हकदार नहीं है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान के लाहौर निवासी खालिद मोहम्मद को गोकुलपुरी से 17 फरवरी 1994 को विस्फोटक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप था कि वह अपने साथियों के साथ विस्फोट करना चाहता था।
निचली अदालत ने उसे 1996 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। खालिद ने 2012 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तर्क रखा कि गिरफ्तारी के समय उसकी उम्र मात्र 17 वर्ष थी।
इसके अलावा वह गिरफ्तारी के बाद से ही तिहाड़ जेल में है। अत: उसकी सजा रद्द कर पाकिस्तान वापस भेजने का निर्देश दिया जाए।