19 दिन से कचहरी में वकीलों की चल रही हड़ताल महापंचायत के निर्णय के बाद समाप्त हो गई। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने बताया कि महापंचायत में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि प्रदेश व देश में वादकारियों के हितों को सर्वोच्च मानते हुए अधिवक्ताओं की गरिमा की प्रतिष्ठा को कायम रखते हुए न्यायालयों में दिनांक 18 नवंबर से कार्य करेंगे।
बार सचिव अमित नेहरा ने बताया कि एसोसिएशन गाजियाबाद के सभी सदस्य अपनी संपूर्ण मांगे पूरी न होने तक जिला जज अनिल कुमार दशम के न्यायालय का पूर्णरूप से बहिष्कार करेंगे। उसमें उपस्थित होकर कोई नहीं करेंगे, यदि इस कार्यवाही में कोई अड़चन पैदा होती है, सभी की जिम्मेदारी प्रशासनिक जज, मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय की समझी जायेगी। एक सप्ताह में जनपद न्यायाधीश का निलंबन, ट्रांसफर या बर्खास्तगी नहीं हुई तो बुधवार को पूरे प्रदेश में धरना होगा।
शनिवार को कचहरी में आयोजित महापंचायत में उत्तर प्रदेश बार एसोसिएशन के सभी जिले, टैक्स बार, तहसील बार, दिल्ली, एनसीआर, सुप्रीम कोर्ट बार एसोएिशन, एओआर एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने महापंचायत में भाग लिया। इसमें 29अक्तूबर को जिला जज गाजियाबाद के न्यायालय कक्ष में निहत्थे वकीलों पर लाठी चार्ज की कठोर शब्दों में निंदा की गई। जिला जज गाजियाबाद अनिल कुमार दशम के विरुद्ध निलंबन व अवमानना की कार्यवाही का संज्ञान उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय द्वारा नहीं लिए जाने पर रोष व्यक्त किया गया।
वकीलों का कहना था कि लाठी चार्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों व पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही भी नहीं की गई। प्रदेश सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया गया। चार नवंबर को बार काउंसिल ऑफ यूपी के अह्वान पर उत्तर प्रदेश, समन्वय समिति दिल्ली, एनसीआर व उत्तरी भारत के वकीलों द्वारा कार्य बहिष्कार करने के बाद भी संज्ञान न लेना एक बड़ा मुद्दा है। इसकी महापंचायत में कड़े शब्दों में निंदा की गई। महापंचायत में विचार विमर्श के बाद हड़ताल स्थगित करने का प्रस्ताव पास किया गया।