आग लगने के बाद मौके पर पहुंचे दमकल अधिकारियों ने सबसे पहले इलाके की बिजली को बंद करवा दिया, जिसकी वजह से आस पास की फैक्ट्रियों में काम बंद हो गया। उन फैक्ट्रियों में काम करने वाले सारे मजदूर बाहर आ गए। धीरे धीरे उस इलाके में अंधेरा छा गया, लेकिन सैकड़ों की संख्या में मजदूर घटनास्थल पर डटे रहे।
भीतर का मंजर डरावना और भयानक था
आग बुझाने के बाद गोदाम में घुसी पुलिस व दमकल कर्मियों ने बताया कि अंदर का मंजर काफी डरावना और भयानक था। चारों तरफ सिर्फ पटाखों के पैकेट और बुरी तरह से झुलसी हुई लाशें पड़ी थी, जिसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी।
आशंका है कि गोदाम में भारी मात्रा में बारुद रखा था, जिसकी वजह से आग लगने के बाद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल पाया और उनकी दर्दनाक मौत हो गई। अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि गोदाम में प्लास्टिक की फैक्ट्री चलाने का लाइसेंस था। जबकि लंबे समय से पटाखा बनाने का काम चल रहा था।