1971 के युद्ध में जब पाकिस्तानी आर्मी ने किया आत्मसर्मपण
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16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना के समक्ष 93 हजार सैनिकों द्वारा आत्म समर्पण के गौरवमयी इतिहास को शहरवासी शुक्रवार सायं याद करेंगे। मौका होगा सर्व इंडिया फांउडेशन द्वारा आयोजित 'विजय की हुंकार' कार्यक्रम का। भारत-पाक के इस युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व करने वाले पूर्व थलसेनाध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री वीके सिंह सहित कई सेना अधिकारी कार्यक्रम में अपने विचार साझा करेंगे।
ठीक 45 वर्ष पहले भारतीय सेना ने अपने गौरवमय इतिहास का सबसे स्वर्णिम पृष्ठ लिखा था। सेक्टर 21 निवासी मेजर जनरल एसके दत्त बताते हैं कि इस जंग में राजस्थान के लोंगेवाला पोस्ट पर हुआ संघर्ष एक टर्निंग प्वाइंट माना जाता है।
भारत ने पाकिस्तान को यहां ऐसी धूल चटाई, जिसका दूरगामी असर उसके मनोबल पर पड़ा था। चार व पांच दिसंबर को जब दो हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक लोंगेवाला में नाश्ता, रामगढ़ में लंच और जोधपुर में डिनर का सपना लिए आधी रात को भारतीय सीमाओं की ओर बढ़ रहे थे तो पंजाब रेजीमेंट के सिर्फ 120 जवानों इन पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया।
इस हार से पाकिस्तानी सेना का मनोबल ऐसा गिरा कि उसके 93 हजार सैनिक हथियार नहीं उठा पाए और 16 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना के हजारों सैनिकों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ पाकिस्तानी जनरल एके नियाजी सहित भारतीय सेना के समक्ष ढाका में आत्मसमर्पण किया।
इस ऐतिहासिक जीत को 'विजय की हुंकार' के रूप में निगम सभागार में मनाया जाएगा। कार्यक्रम को पूर्व थल सेना अध्यक्ष के साथ 'महाभारत' सीरियल में भगवान कृष्ण की भूमिका निभाने वाले नितेश भारद्वाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंद्रेश कुमार संबोधित करेंगे।